
संगम तीरे बसी तंबू सिटी, PC-X
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के रेतीले तट पर एक नया अस्थायी शहर बस चुका है। महाकुंभ 2025 की भव्य सफलता के बाद अब माघ मेला 2026 को मिनी महाकुंभ का स्वरूप दिया जा रहा है। 3 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलने वाले इस 44 दिवसीय मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। संगम की रेती पर करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में टेंट सिटी खड़ी हो गई है, जहां आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा।
प्रशासन ने इस बार मेले को 'सप्तांक' (7 की थीम) पर आधारित बनाया है। पूरा मेला क्षेत्र '7 सेक्टरों' में विभाजित किया गया है। हर सेक्टर को इंद्रधनुष के 7 रंगों से पहचान दी गई है। वेलकम गेट्स से लेकर बाउंड्री तक रंगों की कोडिंग की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को नेविगेशन में आसानी हो। सेक्टरों में चेकर्ड प्लेट वाली सड़कें बिछाई गई हैं, जिनमें मुख्य मार्ग जैसे 'प्रयागवाल मार्ग', 'कैलाशपुरी मार्ग', 'बजरंगदास मार्ग' और 'भारद्वाज रोड' शामिल हैं। इन सड़कों पर कुल 160 किलोमीटर से अधिक चेकर्ड प्लेटें लगाई गई हैं, जो आवागमन को सुगम बनाएंगी।
मेला क्षेत्र को जगमग बनाने के लिए 11 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट्स और 28 हजार से ज्यादा लैंप लगाए गए हैं। पावर कारपोरेशन ने 25 अस्थाई सब-स्टेशन बनाए हैं, जिससे 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित है। पानी की व्यवस्था भी कुंभ मॉडल पर की गई है। सिंचाई विभाग रोज 10 हजार क्यूसेक गंगा जल उपलब्ध करा रहा है। पेयजल के लिए हजारों हैंडपंप, टैंकर और पाइपलाइन बिछाई गई हैं। सफाई के लिए हजारों शौचालय और यूरिनल बनाए गए हैं, साथ ही वेक्टर कंट्रोल यूनिट तैनात है। स्वास्थ्य सुविधाओं में 2 बड़े अस्पताल, 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुर्वेदिक-होम्योपैथिक यूनिट्स शामिल हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे ऊपर है। मेला क्षेत्र को अभेद्य सुरक्षा घेरे में लिया गया है। पुलिस, PAC, NDRF और जल पुलिस की टीमें तैनात हैं। 17 अस्थाई थाने, 40 से अधिक पुलिस चौकियां, सैकड़ों CCTV कैमरे, ड्रोन निगरानी और स्नाइपर्स की तैनाती की गई है। 8 किलोमीटर लंबे अस्थाई स्नान घाट बनाए गए हैं, जहां गोताखोर और बैरिकेडिंग से सुरक्षा सुनिश्चित है। 7 पांटून पुल (कुछ भगवा रंग में) गंगा-यमुना को जोड़ रहे हैं, ताकि भीड़ का दबाव संगम नोज पर न पड़े।
यह नया शहर सिर्फ टेंटों का नहीं, बल्कि आस्था, व्यवस्था और आधुनिकता का अनोखा संगम है। साधु-संतों के डेरे जम चुके हैं, कल्पवासी आ चुके हैं और संगम तट पर हर तरफ 'हर हर गंगे' की गूंज सुनाई दे रही है। माघ मेला 2026 न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि प्रयागराज को वैश्विक पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। अगर आप भी संगम स्नान की योजना बना रहे हैं, तो यह दिव्य अनुभव आपके जीवन को बदल सकता है
Updated on:
02 Jan 2026 06:27 pm
Published on:
02 Jan 2026 06:26 pm
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