इस देवी माँ के मंदिर में नहीं है कोई प्रतिमा, इस तरह होता है चमत्कारी शक्ति का दर्शन

माँ की अद्भुत शक्तियों का होता है अहसास

प्रयागराज। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर धर्म नगरी के आलोपशंकरी मंदिर में भी आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। ये मंदिर देश का अद्भुत देवी मंदिर है। यह मंदिर मां के 51 सिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। संगम नगरी में स्थापित यह चमत्कारी आशीष देने वाला मन्दिर माना जाता है। मान्यता है की यहाँ आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता। मां अपने दर पर आने वाले भक्त हर मुराद पूरी करती है। इस देवी मंदिर में माँ की अद्भुत शक्तियों का अहसास होता है। कहा जाता है की यहां माँ के कुंड का जल ग्रहण करने से सभी तरह की बाधाएं जीवन से कट जाती है।

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सती का पंजा गिरा था
मां अलोप शंकरी का मंदिर संगम तट से पहले अलोपीबाग में स्थित है। मंदिर के पुजारी विवेक भारती ने बताया कि पुराणों के अनुसार अलोपशंकरी मंदिर में मां सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरा था। गिरते ही वह अदृश्य यानी अलोप हो गया था।जिसके चलते इस मंदिर का नाम अलोप शंकरी मंदिर हुआ। अलोपशंकरी मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था है। माँ के दर पर वैसे तो वर्ष भर भक्तों का आना होता है। लेकिन नवरात्रि में माँ के दर्शन के लिए यहाँ भोर से लेकर रात तक भीड़ लगी होती है।

गर्भगृह के कुंड में है चमत्कारी शक्तियाँ
यह मंदिर सनातन धर्म का ऐसा एक मात्र मंदिर कहा जाता है जहां मां की मूर्ति स्थापित नहीं है। आलोपशंकरी मंदिर के मुख्य गर्भ गृह में एक चबूतरा है। जिसके मध्य भाग में एक कुंड है। जिसमें मां को चढ़ाए जाने वाले नारियल का जल अर्पित किया जाता है। कहा जाता है की कभी इस कुंड में नारियल के आलावा कोई जल नही डाला गया ।लेकिन यह कभी यह खाली नही होता है। जिसे माँ की चमत्कारी शक्ति का प्रभाव माना जाता है। माँ इस कुंड के ऊपर एक झूला . पालना लगा हुआ है। जिसे लाल कपड़ों से श्रृंगार करके ढक कर रखा जाता है।


होता है माँ का सोलह श्रृंगार
पुजारी विवेक भारती के अनुसार हर दिन यहां मां का सोलह श्रृंगार किया जाता है। मां सती के हाथ का पंजा गिरने की वजह से यह स्थान मां के अन्य शक्तिपीठों की तरह बेहद विशेष है। मां के चबूतरे के मध्य में स्थित कुंड के जल को चमत्कारिक शक्तियों वाला माना जाता है। माता के पवित्र पर्व नवरात्रि में इस विशेष मंदिर में मां के झूले को स्पर्श कर दर्शन करने का विशेष महत्व माना जाता है। पुजारी के मुताबिक शिवप्रिया सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरकर अदृश्य हो गया जो गिरते ही अलोप हो गया जिसकी वजह से यह मंदिर अलोप शंकरी के नाम से विश्वविख्यात हुआ।


हाथों में बांधा जाने वाला विशेष महत्व का रक्षा
इस अद्भुत मंदिर में प्रमुख गर्भ गृह में भले ही कोई मूर्ति स्थापित ना हो लेकिन मंदिर के बाहर वर्षों पहले स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन ने मां के नौ स्वरूपों को स्थापित कराया है।जहां पर लोग आते हैं दर्शन करते हैं। मां के दर पर माथा टेकते हैं। कहा जाता है मां के चबूतरे के मध्य भाग में स्थित कुंड के जल को पीने से किसी भी तरह की बाधा से जीवन मुक्त हो जाता है। मान्यता है कि मंदिर के पुजारी द्वारा भक्तों के हाथों में रक्षा सूत्र बंधवाया जाता है। वह हमेशा भक्तो की रक्षा करता है । साथ ही मां के दरबार से मिले फूल को अपने घर के धन स्थान पर रखने से उसमें वृद्धि और समृद्धि होती है।

प्रसून पांडे
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