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लेटे हनुमानजी का चरण धोने पहुंची गंगा मईया, जानिए क्यों रहता है श्रद्धालुओं को इस पल का बेसब्री से इंतजार

कहा जाता है कि जब लंका विजय करने के बाद हनुमानजी को थकान लगी तो प्रयाग की धरती संगम किनारे विश्राम के लिए लेटे थे, तब से लेकर आज तक मां गंगा हनुमानजी को साल में एक बार स्नान कराती हैं। जिस वर्ष यह नहीं होता है उस वर्ष को अमंगल माना जाता है। गंगा मईया के इस विकराल रूप को देखने के लिए भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है। गुरुवार शाम गंगा मईया लेटे हनुमानजी का दर्शन करने के लिए हनुमान मंदिर द्वार पर पहुंच गई हैं।

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लेटे हनुमानजी का चरण धोने पहुंची गंगा मईया:  जानिए क्यों रहता है श्रद्धालुओं को इस पल का बेसब्री से इंतजार

लेटे हनुमानजी का चरण धोने पहुंची गंगा मईया: जानिए क्यों रहता है श्रद्धालुओं को इस पल का बेसब्री से इंतजार

प्रयागराज: तीर्थों का राजा प्रयागराज में गंगा, यमुना और आदृश्य सरस्वती का संगम है। इन दिनों गंगा-यमुना दोनों नदिया उफान पर हैं। लगातार जलस्तर में बढ़ोत्तरी के चलते गंगा लेते हनुमानजी का दर्शन करने द्वार पर पहुंच गई है। सुबह तक में गंगा मइया पूर्ण रूप से लेटे हनुमानजी को स्नान करा सकती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान् शिव के ग्यारहवें अवतार रुद्रावतार हनुमान का अभिषेक कराने स्वयं गंगा माँ उनके द्वार पर पहुँच गई।

जानें क्या है पुरानी मान्यता

यह भी कहा जाता है कि जब लंका विजय करने के बाद हनुमानजी को थकान लगी तो प्रयाग की धरती संगम किनारे विश्राम के लिए लेटे थे, तब से लेकर आज तक मां गंगा हनुमानजी को साल में एक बार स्नान कराती हैं। जिस वर्ष यह नहीं होता है उस वर्ष को अमंगल माना जाता है। गंगा मईया के इस विकराल रूप को देखने के लिए भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है। गुरुवार शाम गंगा मईया लेटे हनुमानजी का दर्शन करने के लिए हनुमान मंदिर द्वार पर पहुंच गई हैं।

यह भी पढ़ें: प्रयागराज में गंगा-यमुना बढ़ने से कई इलाकों में घुसा पानी, घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग

हनुमानजी का अभिषेक होने पर होता है शुभ

संगमनगरी प्रयागराज में गंगा-यमुना जलस्तर बढ़ने के लिए भक्त सच्चे मन से कामना करते हैं। जब गंगा मईया लेटे हनुमानजी का अभिषेक कराने उनके द्वार पहुंच जाती हैं तो इस दुर्लभ संयोग को देखने के लिए हजारों की भीड़ जमा होती है। ऐसे होने से साल शुभ का संकेत लेकर आता है ऐसी लोगों में मान्यता है। लेटे हनुमानजी मंदिर पहुंची गंगा मईया की पूजा अर्चना के लिए तैयारी शुरू हो गई है।