scriptHigh Court said - minority institutions have the privilege of appointm | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अल्पसंख्यक संस्थानों को कर्मचारियों की नियुक्ति का है विशेषाधिकार | Patrika News

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अल्पसंख्यक संस्थानों को कर्मचारियों की नियुक्ति का है विशेषाधिकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में आदेश देते हुए कहा कि सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत विशेष अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार के तहत वह अपने यहां कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं, उसमें राज्य सरकार की ओर से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।

इलाहाबाद

Published: June 07, 2022 12:57:24 pm

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अल्पसंख्यक के एक मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश देते हुए कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों को कर्मचारियों की नियुक्ति का विशेषाधिकार है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में आदेश देते हुए कहा कि सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत विशेष अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार के तहत वह अपने यहां कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं, उसमें राज्य सरकार की ओर से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अल्पसंख्यक संस्थानों को कर्मचारियों की नियुक्ति का है विशेषाधिकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अल्पसंख्यक संस्थानों को कर्मचारियों की नियुक्ति का है विशेषाधिकार
मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ स्थित अल्पसंख्यक संस्थान श्री उदय सिंह जैन कन्या इंटर कॉलेज में कार्य लिपिक मनोज कुमार जैन की नियुक्ति को सही करार दिया और जिला विद्यालय निरीक्षक को मामले में फिर से निर्णय लेने का आदेश पारित किया। मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मनोज कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में कहा गया कि विद्यालय प्रबंध समिति ने याची की लिपिक संवर्ग में नियुक्ति जनवरी 2018 में की थी, जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया था।
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याची ने वर्ष 2018 में डीआईओएस के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश को निरस्त करते हुए पुन: आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। किंतु जिला विद्यालय निरीक्षक ने दूसरी बार भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने में अपनी असहमति जताई थी।

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