1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवकाश घोषित, 17 सितंबर शनिवार को खुलेगा कोर्ट

इन अवकाश की जगह में 17 सितंबर 22 शनिवार को कोर्ट खुलेगी। हाईकोर्ट में एक जून से 30 जून तक ग्रीष्म कालीन अवकाश है। शुक्रवार एक जुलाई को अवकाश घोषित करने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट 4 जुलाई को खुलेगा। इस आशय की अधिसूचना महानिबंधक आशीष गर्ग ने जारी की है।

less than 1 minute read
Google source verification
एक जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवकाश घोषित, 17 सितंबर शनिवार को खुलेगा कोर्ट

एक जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवकाश घोषित, 17 सितंबर शनिवार को खुलेगा कोर्ट

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्रीष्म कालीन अवकाश की तारतम्यता में एक जुलाई 22 शुक्रवार को अवकाश घोषित किया गया है। प्रयागराज व‌ लखनऊ दोनों जगह लागू होगा। इस दिन कोर्ट बंद रहेगी किंतु कार्यालय खुले रहेंगे। इन अवकाश की जगह में 17 सितंबर 22 शनिवार को कोर्ट खुलेगी। हाईकोर्ट में एक जून से 30 जून तक ग्रीष्म कालीन अवकाश है। शुक्रवार एक जुलाई को अवकाश घोषित करने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट 4 जुलाई को खुलेगा। इस आशय की अधिसूचना महानिबंधक आशीष गर्ग ने जारी की है।

हाईकोर्ट : कैंट बोर्ड के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर लगाई रोक

प्रयागराज: कैंटोनमेंट बोर्ड मेरठ द्वारा विवादित संपत्ति के ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और सिविल जज वरिष्ठ श्रेणी मेरठ को याची की निषेधाज्ञा अर्जी को तय तिथि पर नियमानुसार उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। संजीव ओबेरॉय की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ सुनवाई कर रही थी।

याची की तरफ से कहा गया कि विवादित संपत्ति को लेकर सिविल वाद दायर है। जिसपर दाखिल निषेधाज्ञा अर्जी की सुनवाई 20 जून को होगी। किंतु बोर्ड ने सुनवाई से पहले 16 जून को ही ध्वस्तीकरण कार्रवाई की नोटिस जारी की है। कोर्ट से तुरंत सुनवाई की मांग पर फाइल मंगा कर कोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने आदेश की प्रति सिविल जज व कैंटोनमेंट बोर्ड के सी ई ओ को अनुपालनार्थ प्रेषित करने का निर्देश दिया है।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा: उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में सहानुभूति या करुणा की नहीं होती भूमिका

मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विचार किए बगैर एक उत्तर को सही करके परिणाम घोषित किया गया।