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हजारो की भीड़ नहीं संभालने पर अखिलेश ने जिस अधिकारी को हटाया था, अब करोड़ों लोगों का मेला कराके खुद को किया साबित

भगदड़ में गयी थी 25 लोगों की जान
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प्रयागराज

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Devesh Singh

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Updated: 12 Feb 2019, 12:34 PM IST

Rajghat Bridge

Rajghat Bridge

प्रयागराज. समय कभी एक जैसा नहीं रहता है। यह बात सभी पर लागू होती है। प्रदेश के एक युवा आईएएस पर यही कहानी बिल्कुल फिट बैठती है। शानदार काम कर रहे इस अधिकारी की कुर्सी हजारों की भीड़ नहीं संभालने पर गयी थी। यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश ने ही इस अधिकारी को हटाया था लेकिन उसी अधिकारी ने अब करोड़ों की भीड़ संभाल कर अपने उपर लगा दाग धो दिया है।
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IMAGE CREDIT: Patrika

हम बात कर रहे है युवा आईएएस अधिकारी विजय किरन आनंद की। वर्ष 2016 में सपा सरकार में विजय किरन आनंद को बनारस के जिलाधिकारी पद पर तैनात थे। विजय किरन आनंद ने कुछ माह में ही काशी की तस्वीर बदल दी थी। बाइक पर बैठ कर शहर घुमते हुए उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था को ठीक कर दिया था। प्राइमरी पाठशाला में शिक्षकों की उपस्थिति शतप्रतिशत उपस्थित सुनिश्चित होने के साथ ही उनकी उपस्थिति को वाट्सएप से जोड़ा था। विजय किरन आनंद खुद एकाउंट के जानकार थे इसलिए सरकारी अस्पतालों को एकाउंट को खंगाल कर हुए खेल को भी पकडऩा शुरू कर दिया था। अभी तक सब सही चल रहा था लेकिन 16 अक्टूबर 2016 को बनारस के राजघाट पुल पर भगदड़ मच गयी। काशी के इतिहास में पहली बार भगदड़ में 25 लोगों की मौत हुई थी। बनारस व चंदौली सीमा के पास डोमरी गांव में आयोजित बाबा जयगुरुदेव की जयंती में भाग लेने हजारों लोग शहर पहुंचे थे। राजघाट पुल पार करते समय पुल टूटने की अफवाह के चलते ही भगदड़ मची थी। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में हुई घटना से सियासी तूफान मच गया था। यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने लापरवाही के आरोप में बनारस के तत्कालीन एसपी सिटी सुधाकर यादव, एसपी ट्रैफिक कमल किशोर, सीओ कोतवाली राहुल मिश्रा, एसओ रामनगर अनिल कुमार सिंह, जिला मजिस्ट्रेट बीबी सिंह, अपर जिला मजिस्ट्रेट (नगर) विंध्यवासिनी राज आदि अधिकारी को निलंबित किया गया था। लापरवाही के आरोप में ही बनारस के तत्कालीन जिलाधिकारी विजय किरन आनंद को हटा दिया गया था।
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अब करोड़ों लोगों का मेला करा कर खुद को किया साबित
यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद विजय किरन आनंद को सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी। प्रयागराज कुंभ मेला कराने के लिए विजय किरन आनंद को मेलाधिकारी बनाया गया। इस समय कहा गया था कि जिस अधिकारी के कार्यकाल में राजघाट पुल पर भगदड़ हुई थी उसी अधिकारी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गयी। विजय किरन आनंद ने इन बातों को नजरअंदाज किया और मेला कराने की तैयारी में जुट गये। विजय किरन आनंद व उनकी टीम को पहली सफलता जब मिली जब मकर संक्राति पर दो करोड़ लोगों ने आराम से संगम में डुबकी लगायी थी। इसके बाद मौनी अमावस्या पर तीन दिन में पांच करोड़ से अधिक व बसंत पंचमी पर डेढ़ करोड़ लोगों ने संगम में स्नान किया। तीनों शाही स्नान की व्यवस्था इतनी अच्छी बनायी गयी थी कि भगदड़ नहीं हो पायी। अभी कुंभ मेले में माघ पूर्णिमा व महाशिवरात्रि का स्नान बचा हुआ है जिसमे अधिक भीड़ होने की संभावना नहीं है। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने करोड़ों की भीड़ को संभाल कर अपना पुराना दाग धो दिया है।
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ऐसी की प्लानिंग की नहीं हुई कोई दिक्कत
मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने कुंभ को लेकर खास प्लानिंग की थी। कुंभ के आठ किलोमीटर दायरे में 40 घाट बनाये गये हैं। रोडवेज बस व रेलवे की स्पेशल ट्रेन चला कर यात्रियों को उनके गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की गयी है। शहर में लाखों वाहन की पार्किंग के लिए कई पार्किंग स्थल बनाये गये हैं। इसके अतिरिक्त संगम तट तक जाने के लिए अलग-अलग रास्ते, 21 पीपा का पुला आदि बनाने से एक जगह भीड़ जुट नहीं पा रही है। संगम पर तैनात पुलिसकर्मी लोगों को अधिक देर तक नहाने नहीं देती है जिसके चलते लोगों की कम भीड़ लगती है। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद की अभी तक की प्लानिंग कामयाब साबित हुई है और कुंभ मेला करा कर खुद को साबित किया।
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