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Mahant Narendra Giri Death : चेलों की दगाबाजी से परेशान अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने लगाई फांसी, हरिद्वार से आनंद गिरी हिरासत में

Mahant Narendra Giri Death : महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला छह पन्ने का सुसाइड नोट, कथित उत्तराधिकारी आनंद गिरि हरिद्वार से हिरासत में लिया गया
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प्रयागराज

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Hariom Dwivedi

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Updated: 20 Sep 2021, 10:22 PM IST

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महंत नरेंद्र गिरी के निधन के बाद प्रयागराज के दारागंज में बाघम्बरी गद्दी मठ के बाहर लगी भीड़

प्रयागराज. Mahant Narendra Giri Death : देश के साधु-संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने सोमवार को आत्महत्या कर ली। लाखों साधु-संतों की समस्याओं को चुटकियों में निपटाने वाले नरेंद्र गिरि अपनी व्यक्तिगत उलझन नहीं सुलझा सके और फांसी पर लटक गए। पिछले सात-आठ महीने से श्रीमठ बाघंबरी गद्दी और निरंजनी अखाड़े की अरबों की सपंतियों के हेरफेर के विवाद में फंसे महंत को उनके अपने प्रिय चेलों ने ही धोखा दिया। मानसिक तौर पर परेशान चल रहे महंत ने अपनी मौत के पहले 6 पन्नों का सुसाइड लिखा। जिसमें उन्होंने मठ के कथित उत्तराधिकारी और शिष्य आनंद गिरि का साफ तौर पर उल्लेखउ किया है। आनंद गिरि को पुलिस ने हरिद्वार में हिरासत में ले लिया है। सभी शिष्यों से पूछताछ की जा रही है।

छह माह पहले आनंद गिरि से विवाद
करीब छह माह पहले नरेंद्र गिरि का महंत आनंद गिरि के साथ विवाद हुआ था। तब उन्होंने आनंद को अखाड़े से निकाल दिया था। तब आनंद ने प्रेस कांफ्रेस कर महंत नरेंद्र पर अरबों की संपत्ति में धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। आनंद ने 2019 में निरंजनी अखाड़े के पूर्व सचिव महंत आशीष गिरि की संदिग्ध मौत का दोषी नरेंद्र गिरि को बताते हुए कई राज का पर्दाफाश करने का दावा किया था। इसके बाद लखनऊ में एक प्रमुख विपक्षी पार्टी के अध्यक्ष ने दोनों के बीच समझौता करवाया था। और विवाद शांत हो गया था। आनंद की अखाड़े में वापसी भी हो गयी थी। उसी समय से महंत काफी दु:खी चल रहे थे।

चेलों की दगाबाजी का जिक्र
पुलिस के मुताबिक सुसाइड नोट महंत नरेंद्र ने चेलों की दगाबाजी का जिक्र किया है। आइजी जोन कवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शाम लगभग 5.30 बजे महंत की मौत की खबर की जानकारी मिकी। छ: पन्नों के सुसाइड नोट में महंत ने बाघम्बरी गद्दी का जिक्र करते हुए कुछ शिष्यों से बहुत दु:खी होने की बात कही है। लिखा है गद्दी के कुछ शिष्यों पर ध्यान दिया जाए।

उत्तराधिकार को लड़ाई
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष, बड़े हनुमान मंदिर व श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के पीठाधीश्वर महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को 2005 में महंत नरेंद्र का उत्तराधिकारी बनाया गया था। 2012 में वसीयत हुई थी। बाद में उसे निरस्त कर दिया गया था। यहीं से आनंद गिरि के साथ मनमुटाव शुरू हुआ।

13 अखाड़ों की परिषद के अध्यक्ष
महंत नरेंद्र गिरि देश के प्रमुख 13 अखाड़ों की प्रतिनिधि संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के लगातार दूसरी बार अध्यक्ष चुने गए थे। अखाड़ा परिषद ही महा मंडलेश्वर और बाबाओं को सर्टिफिकेट देती है। कुंभ मेलों में अखाड़ो स्नान आदि को परिषद ही तय करती है।

क्या है अखाड़ा परिषद
अखाड़ों के जिम्मे एक तरह से हिंदू धर्म की रक्षा का भार है। सनातन धर्म की की बद्रीनाथ, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी और द्वारिका पीठ की स्थापना के समय ही आदि गुरु शंकराचार्य ने मठ या अखाड़ों की स्थापना की थी। तब यह मठ, मंदिरों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बने थे। 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का गठन हुआ।

सपा से था जुड़ाव
स्वामी नरेंद्र गिरि का समाजवादी पार्टी से जुड़ाव रहा है।बाघंबरी गद्दी मठ और संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के प्रबंधन का दायित्व भी मंहत नरेंद्र गिरि के जिम्मे था।

आनंद गिरि ने खुद को बताया बेकसूर, बोले गुरू जी हुई है हत्या
हिरासत में लिए जाने के पहले आनंद गिरि मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि इस बात में उन्हें कोई शक नहीं कि उनके गुरू महंत नरेंद्र गिरि की हत्या की गई है। इसमें कौन लोग शामिल है, इस बात का खुलासा होना चाहिए। कई लोग ऐसे हैं जिन पर उन्हें शक है और सच्चाई सामने आनी चाहिए। मैं अगर दोषी पाया जाता हूं तो फिर मुझे भी सजा मिलनी चाहिए।

तीन पुलिस हिरासत में
आनंद गिरि के अलावा दो अन्य शिष्यों आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को प्रयागराज में पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन तीनों का नाम सुसाइड नोट में है।

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