अलवर. आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी रविवार को देवशयन एकादशी के रूप में मनाई गई। इस दिन शादी का अबूझ मुहूर्त था इसके चलते शहर व गांव में शादियों की धूम रही। इसके बाद चार माह के लिए मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इसके चलते सगाई होने वाले युवक युवतियों को शादी के […]
अलवर. आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी रविवार को देवशयन एकादशी के रूप में मनाई गई। इस दिन शादी का अबूझ मुहूर्त था इसके चलते शहर व गांव में शादियों की धूम रही। इसके बाद चार माह के लिए मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इसके चलते सगाई होने वाले युवक युवतियों को शादी के लिए 118 दिन का इंतजार करना होगा। देवउठनी एकादशी पर शादी की शहनाई फिर से बजने लगेगी।
कथा, प्रवचन सत्संग का चलेगा दौरमान्यता है कि श्रीहरि भगवान विष्णु चार्तुमास के दौरान चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैँ और सृष्टि की सत्ता के संचालन का भार भगवान भोलेनाथ को सौंपकर रविवार से योग निद्रा में जाकर विश्राम करेंगे। इस अवधि में मांगलिक कार्य नही होंगे, परंतु पूजा, कथा, प्रवचन होंगे और व्रत भी त्योहार मनाए जाएंगे। देवशयन एकादशी पर विष्णु भगवान निद्रा से जागेंगे। इसके बाद मांगलि कार्य प्रारंभ होंगे।
नवंबर में रहेंगे नौ सावे
देवउठनी एकादशी पर शादी का अबूझ सावा रहेगा। इसके बाद सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश के बाद 20 दिन के लिए फिर मांगलिक कार्य पर विराम लग जाएगा। इसके बाद 22 नवंबर से मांगलिक कार्य शुरू होंगे। नवंबर में 22, 23, 24, 25, 27, 29, 30 और दिसंबर में 4, 5, 11 को पंचागीयसावे रहेंगे।