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अलवर में अब AI संभालेगा ट्रैफिक की कमान, भूगोर तिराहे पर ट्रायल सफल

राजस्थान के अलवर शहर की सड़कों पर अब यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदलने वाली है। शहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित 'स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' का ट्रायल सफल हो गया है।

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भूगोर तिराहे पर लगाए गए सेंसर आधारित कैमरे

राजस्थान के अलवर शहर की सड़कों पर अब यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदलने वाली है। शहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित 'स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' का ट्रायल सफल हो गया है। हाल ही में भूगोर तिराहे पर मशीन लगाकर इसका परीक्षण किया गया, जिसमें यह सिस्टम वाहनों की ट्रैकिंग और हाई-स्पीड नंबर प्लेट कैप्चर करने में पूरी तरह खरा उतरा है।

यह सिस्टम मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर की तर्ज पर काम करेगा। यूआईटी (UIT) के अनुसार, इस महीने के अंत तक इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। पहले चरण में जेल सर्किल से लेकर कटीघाटी तक के मार्ग को इस स्मार्ट सिस्टम से जोड़ा जा रहा है।

ट्रायल में नंबर प्लेट पर रही पैनी नजर

यूआईटी सचिव स्नेहल नाना के अनुसार भूगोर तिराहे पर किए गए ट्रायल के दौरान एआई कैमरों की क्षमता को परखा गया। इस सिस्टम ने न केवल तेज रफ्तार वाहनों को ट्रैक किया, बल्कि उनकी नंबर प्लेट को भी स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड किया।

यातायात पुलिस ने सिस्टम की कार्यक्षमता को देखते हुए इसमें कुछ नए फीचर्स जोड़ने की मांग की है। इसके लिए यूआईटी ने संबंधित कंपनी को पत्र लिखकर जरूरी बदलाव करने को कहा है ताकि अलवर की सड़कों को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

सिस्टम के 3 बड़े फायदे: सुरक्षा से लेकर सुविधा तक

ऑटोमेटिक चालान: रेड लाइट जंप करना, ओवरस्पीडिंग या बिना हेलमेट गाड़ी चलाना अब महंगा पड़ेगा। एआई कैमरे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कर सीधा चालान काटेंगे।

अपराध पर लगाम: संदिग्ध वाहनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग होने से शहर में होने वाली आपराधिक गतिविधियों और वाहन चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

जाम से मुक्ति: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसर और डेटा एनालिसिस के जरिए यह सिस्टम ट्रैफिक के दबाव को खुद मैनेज करेगा, जिससे चौराहों पर बेवजह जाम नहीं लगेगा।

इमरजेंसी में बनेगा 'ग्रीन कॉरिडोर'

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका 'इमरजेंसी रिस्पॉन्स' मोड है। अगर सड़क पर कोई एम्बुलेंस या दमकल की गाड़ी आती है, तो सिस्टम उसे तुरंत ट्रैक कर लेगा। उन वाहनों को प्राथमिकता देने के लिए यह खुद-ब-खुद सिग्नल को ग्रीन कर 'ग्रीन कॉरिडोर' बना देगा, जिससे कीमती जान बचाई जा सकेगी।

स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगने के बाद अलवर न केवल आधुनिक शहरों की कतार में खड़ा होगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी भारी कमी आने की उम्मीद है। अब बस इंतजार है इसके पूरी तरह शुरू होने का, जिसके बाद सड़कों पर पुलिस के बजाय 'एआई' की नजर होगी।