26 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अलवर: दो बार किया आवेदन खारिज, फिर चार साल बाद बनाया लिपिक

अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्ती-2022 के बाद अब वर्ष 2017 की भर्ती में भी गड़बडि़यां सामने आनी शुरू हो गई हैं।

2 min read
Google source verification

अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्ती-2022 के बाद अब वर्ष 2017 की भर्ती में भी गड़बडि़यां सामने आनी शुरू हो गई हैं। इस भर्ती में पूर्व सीईओ की ओर से एक अभ्यर्थी का दो बार आवेदन खारिज किया गया, लेकिन वर्ष 2017 में संबंधित अभ्यर्थी चैकलिस्ट बदलकर उसे लिपिक बना दिया गया। इसके दस्तावेज मामले की जांच कर रहे अधिकारी को भेजे गए हैं। लिपिक भर्ती-2013 में दस्तावेज सत्यापन कराते समय एक अभ्यर्थी की ओर से प्रस्तुत किए गए कंप्यूटर प्रमाण पत्र को तत्कालीन सीईओ कमल राम मीणा ने खारिज कर दिया।

सनराइज यूनिवर्सिटी की डिग्री लगाई

चैकलिस्ट पर सीईओ ने लिखा कि ऑनलाइन फॉर्म में कोटा की आरएससीआइटी कंप्यूटर डिग्री लिखी है, जबकि अभ्यर्थी सनराइज यूनिवर्सिटी की कंप्यूटर डिग्री लेकर आया है। उन्होंने चैकलिस्ट पर तीन अलग-अलग स्थानों पर आवेदन के खारिज होने की बात लिखी थी। इसके बाद आवेदक ने अपनी लिखित परिवेदना देकर बताया कि उसने ऑनलाइन फॉर्म में कोटा ही लिखा था, लेकिन इस परीक्षा में वह फेल हो गया, इसलिए सनराइज यूनिवर्सिटी की डिग्री लगाई है। सीईओ ने फिर से परिवेदना पर लिखा कि डिग्री भिन्न है। आवेदन खारिज किया जाता है।

2 बार आवेदन खारिज

वर्ष 2017 में लिपिक भर्ती का दूसरा चरण चला। उसी दौरान इस अभ्यर्थी को सनराइज यूनिवर्सिटी की डिग्री के आधार पर लिपिक बना दिया गया, जबकि पूर्व सीईओ की ओर से 2 बार आवेदन खारिज किया गया था। यह डिग्री भी अभ्यर्थी ने संविदा की नौकरी करते समय ली थी और अनुभव अवधि ओवरलैप हो रही थी, इसलिए वर्ष 2017 में इस डिग्री को संध्याकालीन कक्षा में होना बताकर नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए। इधर, इस संबंध में जिला परिषद के सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र कहते हैं कि इस तरह का कोई मामला उनके पास आएगा, तो दिखवाएंगे।

इस आदेश के तहत खारिज हुआ था आवेदन

भर्ती के लिए 7 जून 2013 में जारी नियमों के बिंदु संख्या 18 में साफ था कि ऑनलाइन फॉर्म में यदि कंप्यूटर डिग्री या डिप्लोमा में एपियर होना लिखा जाएगा और आवेदक दस्तावेज सत्यापन के समय उस डिग्री को ना दिखाए या उस परीक्षा में अभ्यर्थी फेल हो जाए तो आवेदन खारिज किया जाएगा। कुछ समय पहले जिला कलेक्टर को जिला परिषद अलवर की ओर से भिजवाए गए दस्तावेजों में साफ हुआ कि इसकी नियुक्ति पत्रावली से इसका आवेदन और 2017 में नियुक्ति से जुड़ी चैकलिस्ट ही गायब हो गई है। उल्लेखनीय है कि पंचायत समिति उमरैण से 40 से ज्यादा लिपिकों की पत्रावली से चैकलिस्ट गायब होने का मामला सामने आ चुका है, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया।