
अलवर के सरकारी अधिकारियों की मार के ये लोग है शिकार, नही हो रही सुनवाई
अलवर. जिले की जनता दफ्तरों में चक्कर काटकर भी अपने काम नहीं करा पा रही है। चाहे नगर परिषद हो या बिजली निगम। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के कार्यालयों में भी रोजाना न जाने कितने लोग हार थककर पहुंचते हैं। उनका दर्द जानने के लिए शुक्रवार को पत्रिका ने अलग-अलग कार्यालयों का हाल जाना तो जनता का दर्द सामने आया।
आप भी जनता की पीड़ा को जानिए। ताकि अधिकारियों तक उनकी आवाज पहुंचे और कुछ राहत की सांस मिले।
2 मई के तूफान के बाद से अंधेरे में
जेठ माह की गर्मी आग बरसा रही है, ऐसे में आम आदमी दो घंटे बिना बिजली के नहीं रह पाता। लेकिन बानसूर तहसील के ईसरा का बास निवासी किसान रामधन के घर में पिछले दो माह से बिजली नहीं है। शुक्रवार को कोलीमोरी फाटक स्थित एससी कार्यालय पर सुबह 9 बजे से दोपहर के तीन बजे तक बैठा रहा। लेकिन सहायक कर्मचारी बार- बार यहीं कहता रहा, साहब मिटिंग में हैं। गरीब, अनपढ़ किसान रामधन के घर में आज तक रोशनी नहीं आ पाई है। नई डीपी लगवाने के लिए वह हाथ में बिजली के बिल और आवेदन लिए लिए कभी बानसूर तो कभी एक्सईन के पास पहुंचता फिर भी उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। परिवार अंधेरे में हैं। यह हालत तब है जब गत 2 मई को आए तूफान के बाद शहर और गांव के हालात सामान्य हो गए हैं।
ब्रेन हेमरेज हो चुका, आठ माह से वेतन नहीं
सामान्य अस्पताल के एमओटी में कार्यरत सरला गुप्ता एएनएम वेतन के लिए 8 माह से परेशान हैं। सरला रैणी के कानेटी सब सेंटर पर कार्यरत है। उसको एक बार ब्रेन हेमरेज हो चुका है व परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। इसलिए उसे डेपुटेशन पर अलवर में लगाया गया है।
पूरा परिवार सरला पर निर्भर है, पति छोटी दुकान चलाता है। इस सम्बंध में नर्सिंग नेता भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिल चुके हैं व मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेज चुकी है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रैणी ब्लाक सीएमएचओ का कहना है कि वेतन नहीं मिलेगा। ऐसे में परेशान सरला का कहना है कि अगर उसे वेतन नहीं मिला तो, मैं आत्महत्या कर लूंगी।
पूरा परिवार परेशान, छात्रवृति नहीं मिल रही
अलवर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगाकर एक बेटी और उसके पिता परेशान हो चुके हैं। मुंडावर तहसील के गांव भुनगड़ा अहीर निवासी गुगन प्रजापत की बेटी ने 2015 में नेशनल मिन्स कम मेरिट्स स्कॉलरशिप परीक्षा पास की लकिन इसे अभी तक स्कॉलरशिप नहीं दी गई। इस छात्रा का नाम वरीयता सूची में अंकित है। राजकीय महाविद्यालय में पढ़ रही छात्रा के पिता कई बार शिक्षा अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत की है। मजदूरी करके परिवार चलाने वाले इस पिता की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
Published on:
23 Jun 2018 12:10 pm
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