
कीडा जड़ी मशरूम की प्रजाति है
कृष्ण कुमार अलवर जिले के सिरोड़ खुर्द निवासी है। कृष्ण ने पिता सतवीर के खेती करने के परंपरागत तरीकेे को बदला और मशरूम की खेती शुरू की। आज वह विदेशों में मशरूम भेज रहे हैं। मशरूम से दवाइयां बन रही हैं। कृष्ण ने बायोटेक इंजीनियर की पढ़ाई करने के बाद अपने भाई विजयपाल के साथ मिलकर गांव में मशरूम की पैदावार शुरू की।
उन्होंने बताया कि अपने छोटे से गांव में स्टार्टअप शुरू कर ठंडे प्रदेशों में पैदा होने वाली मशरूम यानी कोर्डिसेप्स मशरूम की पैदावार करने का अपना लक्ष्य बनाया। अब यह मशरूम को न केवल भारत के बड़े शहरों में भेज रहे हैं बल्कि वियतनाम व थाइलैंड तक निर्यात कर रहे हैं।
मशरूम को जीरो कंटेनमेंट जोन में एक लैब में तैयार किया जा रहा है। दवाइयों वाली मशरूम के साथ-साथ खाने वाली मशरूम की भी पैदावार की जा रही है। यह कैंसर, मधुमेह आदि बीमारियों में कारगर साबित हो रही है। इस मशरूम को तैयार करने के लिए लैब में तापमान 16.18 डिग्री और आर्द्रता 75 रहनी चाहिए। यह ब्राउन राइस में तैयार की जाती है। 60 दिनों में यह कोर्डिसेप्स तैयार हो जाती है। इंडिया में अभी इसका मार्केट ज्यादा अच्छा नहीं है लेकिन विदेशों में मांग ज्यादा है।
एक से लेकर तीन लाख रुपए किलो होती है मशरूम
कीडा जड़ी मशरूम की प्रजाति है। इसकी पैदावार के लिए 40 लाख रुपए की लागत से लैब तैयार की गई। इसमें लैब में तीन माह में एक साइकिल यानी 15 किलो मशरूम तैयार की जाती है। इसका भाव देश और विदेश में एक लाख से लेकर तीन लाख रुपए प्रति किलोग्राम है। वहीं सब्जी वाली मशरूम 35 से 40 क्विंटल पैदा की जा रही है। इससे छोटी जगह में अधिक लाभ मिल रहा है। इस मशरूम का उपयोग दवाइयों में किया जाता है। अन्य किसानों को भी वह प्रेरित कर रहे हैं।
Published on:
16 Jan 2024 12:21 pm
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