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अलवर जगन्नाथ महोत्सव: कल निकलेगी सीताराम जी की सवारी

14 जुलाई को सीतारामजी की सवारी रूपबास पहुंचेगी। इसी के साथ रथयात्रा महोत्सव प्रारंभ हो जाएगा। मान्यता है कि सीतारामजी माता जानकी के भाई हैं और बहन की शादी की तैयारियों का जायजा लेने एक दिन पहले रूपबास जाते हैं।

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जगन्नाथ मेले के दौरान मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धालु दंडौती लगाने के लिए आते हैं। लेकिन पुराना कटला जगन्नाथ मंदिर की परिक्रमा कर दंडौती लगाते हैं लेकिन मंदिर के समीप ही कचरे का ढे़र लगा हुआ है। इतना ही नहीं यहां टॉयलेट भी बना हुआ है। इसके चलते यहां हर समय बदबू रहती है।

मंदिर के पास ही सड़क बनाने का काम चल रहा था। इसकी रोडियां और बजरी भी मंदिर के पीछे व पास में पड़ी हुई हैं जिनके चलते दंडौती लगाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होगी। रोडी व बजरी से मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं व वाहन चालकों के साथ दुर्घटना भी हो सकती है।

विवाह के लिए 15 वरमाला में तुलसी और चांदी की विशेष

पुराना कटला जगन्नाथ मंदिर में महोत्सव के तहत अखंड कीर्तन का दौर जारी है। दूर दूर से भजन मंडलियां हरे राम हरे राम, राम राम हरे का अखंड कीर्तन कर अपनी हाजरी लगा रही हैं। सुबह से शाम तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है।

14 जुलाई को सीतारामजी की सवारी रूपबास पहुंचेगी। इसी के साथ रथयात्रा महोत्सव प्रारंभ हो जाएगा। मान्यता है कि सीतारामजी माता जानकी के भाई हैं और बहन की शादी की तैयारियों का जायजा लेने एक दिन पहले रूपबास जाते हैं। यह परंपरा सालों से चली आ रही है।

पहले हाथियों से खींचा जाता था इंद्रविमान, अब ट्रैक्टर से खींच रहे : जगन्नाथ मेले के दौरान जिस इंद्रविमान नामक रथ का प्रयोग किया जाता है वह राजकालीन है। जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान पहले इसमें चार हाथी लगाए जाते थे। इसके बाद इसमें दो हाथी लगाए जाने लगे।

समय के साथ इसमें बदलाव हुआ है और अब इसे ट्रैक्टर की सहायता से खींचा जाता है। ट्रैक्टर की बुकिंग पहले ही हो जाती है। दो मंजिला इंद्र विमान रथ 15 फीट चौडा और 25 फीट लंबा है। इसमें बहलीनुमा पहिये लगे हुए हैं। इंद्र विमान से पहले भगवान जगन्नाथ पुराने रथ में बैठकर रूपबास पहुंचते थे। इसमें अब जानकीजी को विराजमान किया जाता है।

जगन्नाथ व जानकी मैया पहनेंगे 15 वरमाला: भगवान जगन्नाथ व जानकी मैया के वरमाला महोत्सव में उनके 15 वरमाला पहनाई जाएंगी। इसमें परंपरा के अनुसार कंपनी बाग के फूलों की माला पहनाई जाएगी। इसके बाद मंदिर समिति की ओर से चांदी की वरमाला पहनाई जाएगी। वृंदावन से तुलसी की माला के अलावा छत्तीसगढ़, दिल्ली व अन्य जगहों से श्रद्धालुओं की ओर से वरमाला भेजी जाएंगी।