
अलवर जिले में प्रदूषण कम, फिर भी झेलनी पड़ रही पाबंदी
अलवर. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर व दिल्ली में प्रदूषण से पाबंदियों की मार अलवर जिले का पीछा अब तक नहीं छोड़ रही, जबकि रविवार को अलवर में प्रदूषण का स्तर 68 व भिवाड़ी में 120 रहा, जो कि ग्रेप की ज्यादा खतरनाक श्रेणी में शुमार नहीं होता। फिर भी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 800 किलोवाट तक के डीजी सेट का दोहरे ईंधन प्रणाली पर रूपांतरण अनिवार्य किया है।
अलवर जिला एनसीआर में शामिल है, इस कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन की पाबंदियां अलवर जिले में दिल्ली की तरह लागू होती है। यही कारण है कि उद्यमियों को साल के छह महीने इन्हीं पाबंदियों में गुजारने पड़ते हैं।
डीजी सेट दोहरे ईंधन प्रणाली पर बदलना जरूरी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन की ओर से आदेश जारी किए गए हैं कि जिन क्षेत्रों में गैस सप्लाई के लिए बुनियादी ढांचा और आपूर्ति उपलब्ध है, वहां डीजी सेट संचालन के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित और रोकथाम के लिए 800 किलोवाट तक क्षमता के डीजी सेट को दोहरे ईंधन प्रणाली यानी 70 प्रतिशत गैस व 30 फीसदी डीजल पर रूपातंरण आगामी 15 मई तक करना अनिवार्य होगा। यह आदेश ग्रेप के तहत प्रतिबंध के अलावा अन्य अवधि के लिए 15 मई से पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू होगा।
आदेश नहीं मानने पर सील होंगे डीजी सेट
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल अलवर एवं भिवाड़ी क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से जारी सूचना में औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थानों में लगे 800 किलोवाट तक की क्षमता के डीजी सेट को दोहरे ईंधन प्रणाली पर आगामी 15 मई तक आवश्यक रूप से रूपांतरण कराने को कहा गया है। इतना ही नहीं जिन इकाइयों ने अपने डीजी सेट को दोहरे ईंधन प्रणाली 70 प्रतिशत गैस व 30 फीसदी डीजल पर रूपांतरण करा लिया है, वे भी राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल को सूचना देवें, जिससे उनकी सम्मति को संशोधित किया जा सके। वहीं निर्धारित तारीख तक डीजी सेट को दोहरे ईँधन प्रणाली पर रूपांतरित नहीं किए जाने पर विभाग की ओर से दोषी इकाइयों के 800 किलोवाट तक की क्षमता के डीजी सेट को सील कर दिया जाएगा।
Published on:
08 May 2023 12:53 pm
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