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एनसीआर में ऐसा क्या हुआ कि ग्रेप वन लागू करना पड़ा

अलवर समेत एनसीआर में प्रदूषण बढ़कर खतरनाक िस्थति में पहुंचने की आशंका को देख वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनसीआर में ग्रेप वन लागू किया है। इस कारण उद्यमियों व निर्माण एजेंसियों को कई प्रकार की बंदिशें झेलनी होगी। जानते हैं एनसीआर में क्यूं लागू हुआ ग्रेप।

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अलवर

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Prem Pathak

Oct 07, 2023

एनसीआर में ऐसा क्या हुआ कि ग्रेप वन लागू करना पड़ा

एनसीआर में ऐसा क्या हुआ कि ग्रेप वन लागू करना पड़ा

अलवर. मानसून की विदाई के साथ ही अलवर सहित पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। अलवर में प्रदूषण का स्तर बढ़कर 100 तथा भिवाड़ी में 200 एक्यूआइ को पार करने लगा है। साथ ही दिल्ली एवं एनसीआर के अन्य शहरों में प्रदूषण का स्तर खतरे के आंकड़े को पार करने लगा है।

अलवर में शनिवार को प्रदूषण का स्तर 78 तथा एनसीआर में शामिल भरतपुर का 188, दिल्ली का 216 एक्यूआइ रहा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को एनसीआर एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के पूर्व अनुमान के अनुसार आगामी दिनों में क्षेत्र की परिवेशीय वायु गुणवत्ता में गिरावट एवं दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 201 से 300 एक्यूआइ तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसके चलते ग्रेडेड रेस्पोंस एक्शन प्लान (ग्रेप) की प्रथम अवस्था लागू किया है।

ग्रेप वन में ये रहेंगी पाबंदी

500 वर्ग मीटर या अधिक क्षेत्रफल वाली निर्माण गतिविधियां जो राज्य सरकार के वेब पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं, वे प्रतिबंधित रहेगी। वहीं धूल शमन के निर्देशों की पालना कराने, ठोस कचरा अपशिष्ट निर्माण एवं विनिर्माण अपशिष्ट तथा परिसंकटमय अपशिष्ट का नियमित निस्तारण कराने, खुली भूमि पर कचरा नहीं डालने, मैकेनिकल वैक्यूम स्वीपिंग मशीनों से सड़कों की नियमित सफाई कराने, निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन का उपयोग करने, सड़क निर्माण, रखरखाव एवं मरम्मत परियोजनाओं में एंटी स्मॉग गन पानी का छिड़काव धूल दमन का उपयोग करने, बायोमास व ठोस कचरे को खुले में जलाने पर सख्ती से पाबंदी और आदेश की अवहेलना पर भारी जुर्माना लगाने, डंप साइट पर कचरा नहीं जलाने, भीड़भाड़ वाले व भारी यातायात वाले स्थानों पर सुचारू यातायात प्रवाह के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती करने, वाहनों में पीयूसी मानदंडों की कड़ाई से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

उद्योगों के लिए पांबदी लागू

ग्रेप वन के तहत गैर अनुपालन औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने, उद्योगों की ओर से केवल अनुमोदित ईंधन का ही उपयोग करने तथा उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने, उद्योगों, हॉट मिक्स प्लांट एवं ईंट भट्टों में प्रदूषण नियंत्रण नियमों को सख्ती से लागू कराने, पटाखों के प्रतिबंध सम्बन्धी न्यायालय के आदेशों की पालना कराने, औद्योगिक एवं गैर विकास क्षेत्रों में नियमित कचरे का निष्पादन कराने, डिस्कॉम की ओर से एनसीआर में निर्बाध बिजली सप्लाई कराने, होटल, रेस्त्रां और खुले भोजनालय में जलाऊ लकड़ी, कोयले पर प्रतिबंध लगाने और केवल बिजली व स्वच्छ ईंधन गैस आधारित उपकरण का उपयोग करने की छूट रहेगी। डीजल जनरेटर सेट का उपयोग नियमित बिजली की आपूर्ति के स्रोत के रूप में नहीं करने, के निर्देश दिए गए हैं।