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अलवर जिले में नाबालिग के साथ दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के एक मामले में विशिष्ट न्यायालय पॉक्सो संख्या-1 ने न्याय का बड़ा संदेश दिया है। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
विशिष्ट लोक अभियोजक विनोद कुमार शर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना 24 जून, 2024 की है। पीड़िता की मां ने 27 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, शहर से सटे एक ग्रामीण इलाके में पीड़िता का परिवार परचूनी की दुकान चलाता है। पीड़िता के माता-पिता अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते थे, जिस दौरान 13 वर्षीय बेटी दुकान संभालती थी।
आरोप है कि राममुरारी उर्फ लाला और एक अन्य व्यक्ति लगातार पीड़िता को परेशान करते थे और सामान लेने के बहाने उससे दोस्ती करने का दबाव बनाते थे। 24 जून को अभियुक्त ने पीड़िता को कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। उसके बेहोश होने के बाद आरोपी ने उसका शारीरिक शोषण किया और इस दौरान पीड़िता की अश्लील फोटो व वीडियो भी बना लिए।
इतना ही नहीं, आरोपी यहीं नहीं रुका। वह इन अश्लील फोटो और वीडियो के जरिए पीड़िता को डरा-धमकाकर लगातार उसका शोषण करता रहा। साथ ही आरोपी ने पीड़िता को ब्लैकमेल कर उसके घर से नकदी और कीमती आभूषण भी हड़प लिए थे। इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। मामले में 14 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 24 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशिष्ट न्यायाधीश जगेन्द्र अग्रवाल ने आरोपी राममुरारी उर्फ लाला को दोषी करार दिया और उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले से समाज में एक सख्त संदेश गया है कि मासूमों के साथ होने वाले अपराधों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Updated on:
24 Apr 2026 12:25 pm
Published on:
24 Apr 2026 12:25 pm
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