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गोगाजी का मेला भरा, सामाजिक समरसता एवं आस्था का केंद्र

सोडावास कस्बे का गोगाजी मंदिर वर्षों से अनेक समुदाय के लोगों में सामाजिक समरसता एवं आस्था का केंद्र है। जाहरवीर गोगाजी का मेला हर्ष वर्ष की भांति श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन भरता है। इस दिन रात्रि को सत्संग व जागरण होता है। जिसमें गायक कलाकार शानदार लोक प्रस्तुति देते हैं। मेले में बड़ा नगाड़ा रखा जाता है।

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सोडावास कस्बे का गोगाजी मंदिर वर्षों से अनेक समुदाय के लोगों में सामाजिक समरसता एवं आस्था का केंद्र है। जाहरवीर गोगाजी का मेला हर्ष वर्ष की भांति श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन भरता है। इस दिन रात्रि को सत्संग व जागरण होता है। जिसमें गायक कलाकार शानदार लोक प्रस्तुति देते हैं।

मेले में बड़ा नगाड़ा रखा जाता है। जिसे श्रद्धालु बजाकर गोगाजी के चरण में उपस्थिति दर्ज करते हैं। मेले के एक दिन पहले श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर गोगा जी के जन्मोत्सव पर स्थानीय आसपास के ग्रामीण रात्रि को बाबा का जागरण करते हैं।दूसरे दिन गोगा नवमी को घर-घर से गोगा जी की मूर्ति की पूजा हलवे, पूरी, खीर का भोग लगाते हैं।

श्रद्धालु गोगा जी के छत्र चढ़कर व रक्षा सूत्र बांधकर मन्नत मांगते हैं। सोडावास सरपंच सरजीत चौधरी, भामाशाह रामपाल जांगिड़,पूर्व सरपंच सूरजभान बोहरा, ब्राह्मण महासभा प्रवक्ता बाबूलाल जोशी, रोहीतास बोहरा, पप्पू बोहरा, मन्नी बागड़ी, सीताराम लम्बडदार, सुबेसिंह इंजीनियर ने बताया गोगाजी सांपों के देवता व गौरक्षक थे। गोगामेड़ी गोगाजी से ईट लाकर स्थापित की गईं थी तब बाबा के मंदिर का निर्माण हुआ तब से गोगाजी जन्मोत्सव गोगा जी का मेला भरता है। मेले में आए लोग गोगा जी को प्रसाद चढ़कर में रक्षा सूत्र बांधकर मन्नत पूरी करने की कामना करते हैं।

महिलाएं मंदिर में रक्षा सूत्र अर्पित करती है। ग्रामीण बताते हैं कि इस दिन लोगों में हर घर से यही भावना होती है कि मंदिर में हर घर से प्रसादी का भोग लगाते हैं और बाबा के सपरिवार ढोक लगाकर मन्नते मांगते हैं। मेले व जागरण मे कस्बे की सोडावास युवा शक्ति के युवाओ द्वारा कार्यक्रम को सजोया जाता है।