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Alwar News: धार्मिक कॉरिडोर- 14 धार्मिक स्थलों की 90 किमी यात्रा 4 घंटे में होगी पूरी

प्रदेश सरकार ने बजट के जरिए धार्मिक कॉरिडोर बनाने पर जोर दिया है। इसी को लेकर प्रशासन भी कॉरिडोर को लेकर प्लान बना रहा है। राजस्थान पत्रिका ने धार्मिक कॉरिडोर का ऐसा मार्ग एक्सपर्ट की मदद से तैयार किया है, जिससे सीधे 14 धार्मिक स्थल जुड़ जाएंगे। यह कॉरिडोर करीब 90 किमी का होगा, जिसका सफर 4 घंटे में पूरा हो जाएगा।

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अलवर में स्थित हजारों वर्ष पुराना नीलकंठ महादेव मंदिर - (फोटो - पत्रिका)

प्रदेश सरकार ने बजट के जरिए धार्मिक कॉरिडोर बनाने पर जोर दिया है। इसी को लेकर प्रशासन भी कॉरिडोर को लेकर प्लान बना रहा है। राजस्थान पत्रिका ने धार्मिक कॉरिडोर का ऐसा मार्ग एक्सपर्ट की मदद से तैयार किया है, जिससे सीधे 14 धार्मिक स्थल जुड़ जाएंगे। यह कॉरिडोर करीब 90 किमी का होगा, जिसका सफर 4 घंटे में पूरा हो जाएगा। यानी एक बस में बैठते ही आधे दिन में कई देवी-देवताओं के दर्शन हो सकेंगे। यदि प्रशासन इसे धरातल पर उतारता है तो इसी साल के आखिर तक श्रद्धालुओं को लाभ मिल सकेगा।

कॉरिडोर बनते ही श्रद्धालुओं की संख्या तीन गुना बढ़ेगी

एक्सपर्ट कहते हैं कि इस कॉरिडोर का प्रचार-प्रसार भी करना होगा। जब लोगों को यह पता चल जाएगा कि एक बस में बैठते ही सभी देवी-देवताओं के दर्शन एक ही दिन में हो जाएंगे, तो श्रद्धालुओं की संख्या में तीन गुना तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके लिए एक ऐप बनाने की भी जरूरत होगी ताकि जीपीएस लगी बसों की ऑनलाइन ट्रैकिंग की जा सके। हर धार्मिक स्थल पर रुकने का समय तय कर दिया जाए। साथ ही बसों में चालक, परिचालक के अलावा गाइड की तैनाती से रोजगार मिलेगा। बसें नई भी खरीदी जा सकती हैं या अनुबंधित बसों का भी संचालन कॉरिडोर के लिए किया जा सकता है।

यह हो सकता है ग्रामीण एरिया के कॉरिडोर का रास्ता

ग्रामीण इलाकों के धार्मिक स्थलों को शहरी धार्मिक कॉरिडोर से भी जोड़ा जा सकता है और अलग भी किया जा सकता है। पांडुपोल मंदिर, भर्तृहरि धाम, नारायणी माता, तालवृक्ष व नीलकंठ धाम के दर्शन श्रद्धालु एक साथ कर सकते हैं। यहां की दूरी 80 से 90 किमी मध्य होगी। यह यात्रा ढाई घंटे में पूरी हो जाएगी। बसों का संचालन अशोका टॉकीज के अलावा काली मोरी या पुराने बस स्टैंड या हनुमान सर्किल से किया जा सकता है। धार्मिक कॉरिडोर से पहले आकलन करना होगा कि कितने श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों तक आते हैं। उसी के अनुसार बसों का संचालन व किराया तय किया जाए।

शहरी धार्मिक कॉरिडोर

यूआईटी के एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी का कहना है कि शहरी धार्मिक कॉरिडोर व ग्रामीण इलाकों के धार्मिक कॉरिडोर को दो हिस्सा में बांटा जा सकता है। शहरी एरिया में गणेश मंदिर, त्रिपोलेश्वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर व सागर का भ्रमण करने के बाद झंडे वाले हनुमान मंदिर, मंशा माता मंदिर, भूरा सिद्ध मंदिर, हीरानाथ मंदिर में देवी-देवताओं के दर्शन होंगे। इस शहरी कॉरिडोर का रास्ता डेढ़ से 2 घंटे में तय हो जाएगा। बसें जगन्नाथ मंदिर के पास, अशोका टॉकीज व तांगा स्टैंड के आसपास खड़ी की जा सकेंगी। इसके लिए बसों का संचालन रोडवेज से या पुराने बस स्टैंड से सीधे किया जा सकता है।

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