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Alwar: निजी अस्पतालों की 24 घंटे की हड़ताल, स्वास्थ्य सेवाएं ठप; मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

अलवर जिले में निजी अस्पतालों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। डॉक्टरों ने जयपुर के एक चिकित्सक की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाया, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ (फोटो - पत्रिका)

अलवर जिले में निजी अस्पतालों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। डॉक्टरों ने जयपुर के एक चिकित्सक की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाया, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

अलवर जिले में मंगलवार को निजी अस्पतालों की 24 घंटे की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं और मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के आह्वान पर प्रदेशभर में निजी अस्पतालों को बंद रखा गया, जिसका असर अलवर में व्यापक रूप से देखने को मिला। सुबह 8 बजे से शुरू हुई यह हड़ताल अगले दिन यानी 15 अप्रेल सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी, जिससे चिकित्सा सेवाओं पर विपरीत असर बना रहा।

इस हड़ताल का मुख्य कारण जयपुर के निविक अस्पताल के निदेशक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी है। चिकित्सकों का आरोप है कि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में कथित मामूली विसंगतियों के आधार पर पुलिस की ओर से की गई यह कार्रवाई अनुचित और जल्दबाजी में उठाया गया कदम है। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से चिकित्सा क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


हड़ताल के दौरान अलवर के निजी अस्पतालों में ओपीडी (OPD) और आईपीडी (IPD) सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं। कई अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं भी सीमित या बंद रखी गईं, जिससे गंभीर मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ी। इलाज के अभाव में कई मरीजों को निजी अस्पतालों से लौटना पड़ा और उन्हें मजबूरन सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा।

निजी अस्पतालों के बंद रहने का सीधा असर जिला अस्पताल अलवर पर देखने को मिला, जहां मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। अस्पताल में लंबी कतारें लगी रहीं और डॉक्टरों व स्टाफ पर काम का दबाव काफी बढ़ गया। सीमित संसाधनों के चलते मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाया और कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

चिकित्सक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान के लिए यह विरोध जरूरी है और इस मुद्दे पर किसी भी तरह की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।

हालांकि यह हड़ताल केवल 24 घंटे की थी, लेकिन इस दौरान स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीजों ने सरकार से मांग की है कि जल्द समाधान निकालकर ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न होने दी जाए