8 मार्च 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दौड़ा अलवर, ‘महिला मैराथन’ में दिखा नारी शक्ति का जोश

International women 2026 राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में रविवार को 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' के अवसर पर शहर में भव्य ‘महिला मैराथन 2026’ का आयोजन किया गया।

2 min read
Google source verification

महिला मैराथन (फोटो - पत्रिका)

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में रविवार को 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' के अवसर पर शहर में भव्य ‘महिला मैराथन 2026’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ में नारी शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां 10 साल की बालिकाओं से लेकर 80 साल की बुजुर्ग महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

वन मंत्री ने दिखाई झंडी

मैराथन का शुभारंभ सुबह 6 बजे कंपनी बाग स्थित शहीद स्मारक से हुआ। मुख्य अतिथि वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा ने झंडी दिखाकर प्रतिभागियों को रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज का आधार हैं और उनका स्वास्थ्य व स्वावलंबन राष्ट्र की उन्नति के लिए आवश्यक है।

शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी दौड़

कार्यक्रम संयोजिका, एथलीट एवं समाजसेवी एडवोकेट सीमा सैनी ने बताया कि यह मैराथन शहीद स्मारक से शुरू होकर नंगली सर्किल, एस.एम.डी. सर्किल और मोती डूंगरी होते हुए वापस कंपनी बाग पर संपन्न हुई। मैराथन के दौरान पूरे रास्ते महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। 500 से अधिक प्रतिभागियों ने इस दौड़ के जरिए फिटनेस और सशक्तिकरण का संदेश दिया।

विजेताओं का सम्मान और गणमान्य जनों की उपस्थिति

मैराथन के समापन पर मुख्य अतिथि संजय शर्मा ने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। सरस डेयरी के पूर्व चेयरमैन बन्नाराम मीणा और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रधानाध्यापिका नीलम यादव ने भी कार्यक्रम में शिरकत कर महिलाओं का हौसला बढ़ाया।


डॉ. ऋचा गुप्ता ने उपस्थित महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के टिप्स दिए। मैराथन को सफल बनाने में तकनीकी संयोजक कैप्टन उमरावलाल सैनी के नेतृत्व में 40 तकनीकी सहायक, शारीरिक शिक्षक और 50 से अधिक स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच का संचालन रेखा महलावत की ओर से किया गया।