
अलवर में बिना अनुमति के तोड़ी 550 किलोमीटर सडक़ें, नहीं दी कोई सूचना
बिना अनुमति के शहर की 550 किलोमीटर सडक़ें तोड़ दी गईं। न कोई प्लानिंग न कोई सूचना। मनमर्जी से ठेकेदारों ने सीवरेज लाइन व पानी की लाइन डालने के लिए सडक़ों को उधेड़ा है जबकि आम आदमी टूटी सडक़ों पर भी नल कनेक्शन लेने के लिए मांग रहे रोड कटिंग की अनुमति आसानी से नहीं मिल पा रही है। रोड काटने को लेकर अधिकारियों का भी साफ कहना है कि सीवरेज व पानी की लाइनों के लिए अलग से अनुमति नहीं ली गई है।
शहर में आरयूआईडीपी के जरिए सीवरेज लाइन डालने का कार्य करीब चार साल तक चला है। सडक़ें अभी तक बदहाल हैं। कम्पनी के जरिए एक बार लीपापोती करने के बाद सडक़ों की सुध ही नहीं ली गई जबकि आरयूआईडीपी ने कम्पनी को काम पूरा करने का प्रमाण भी थमा दिया। आरयूआईडीपी का अलवर का कार्यालय भी बन्द कर दिया गया है। यहां के अधिकारी व कर्मचारियों को दूसरे प्रोजेक्ट में लगा दिया।
अब यूआईटी के जरिए सीवरेज लाइन डाल रही
शहर में अब यूआईटी के जरिए सीवरेज लाइन डालने का कार्य चल रहा है। इस काम को कर रही एलएनटी कम्पनी नगर परिषद के क्षेत्र में सीवरेज लाइन डाल रही है। जबकि नगर परिषद से रोड कटिंग की कोई अनुमति नहीं ली गई जबकि यहां आमजन की ओर से रोजाना दो से तीन रोड कटिंग की अनुमति केआवेदन आते हैं। जो पहले शुल्क जमा कराते हैं। इसके बाद भी कई चक्कर काटने पर उनको अनुमति मिल पाती है। कई बार तो महीने भी निकल जाते हैं। यही हाल यूआईटी का है। जब आरयूआईडीपी ने सीवरेज लाइन डाली तो यूआईटीसे अनुमति नहीं ली गई।
प्लानिंग से कार्य नहीं
सीवरेज व पानी की लाइन डालने वाले प्लानिंग से भी कार्य नहीं कर रहे हैं। तभी तो आए दिन सडक़ों केरास्ते ही रोक दिए जाते हैं। पिछले करीब तीन दिनों से वण्डर हाइट का दोनों तरफ से रास्ता बाधित है जिसके कारण वण्डर हाइट में रहने वाले अपने वाहन भी आगे नहीं ले जा पा रहे हैं। काला कुआं में जबसीवर व पानी की लाइन डाली तो रोजाना कहीं न कहीं रास्ते रुके रहे। बेतरतीब लाइन डालने की बदहाली चौतरफा है।
फैक्ट फाइल
पानी की लाइन के खोदी सडक़ - 400 किलोमीटर
सीवरेज द्वितीय चरण में सडक़ तोड़ी - 100
पहले चरण में सीवरेज सडक़ उधेड़ी - 98 किलोमीटर
रोड कटिंग की अनुमति - नहीं ली
हमसे अलग से अनुमति नहीं ली
सीवरेज व पानी की लाइन डालने वालों ने नगर परिषद से अलग से कोई अनुमति नहीं ली। वैसे सडक़ ठीक करने की जिम्मेदारी सम्बंधित कम्पनी की है।
पीके जैन, सहायक मुख्य अभियंता, यूआईटी अलवर
Published on:
22 Jun 2018 02:44 pm
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