5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अलवर से एक कविता रोज: एक छोटा सा शब्द, लेखिका- रेखा शर्मा अलवर

माफी एक बहुत ही छोटा शब्द होता है,पर ना जाने क्यों इंसान उसे बोलने में बरसों लगा देता है। हम सदैव हर चीज पहले बोलना चाहते हैं,पर ना जाने क्यों इस शब्द में ऐसा क्या

less than 1 minute read
Google source verification

अलवर

image

Lubhavan Joshi

Oct 07, 2020

Alwar Se Ek Kavita Roj Ek Chota Sa Shadb By Rekha Sharma Alwar

अलवर से एक कविता रोज: एक छोटा सा शब्द, लेखिका- रेखा शर्मा अलवर

माफी एक बहुत ही छोटा शब्द होता है,
पर ना जाने क्यों इंसान उसे बोलने में बरसों लगा देता है।

हम सदैव हर चीज पहले बोलना चाहते हैं,
पर ना जाने क्यों इस शब्द में ऐसा क्या है इससे पहले सुनना चाहते हैं,

जबकि माफी एक छोटा सा शब्द है,
बहुत ही प्रयासों के बाद भी जुबान पर नहीं आता,
ऐसा कितना कठिन है जो बोला ही नहीं जाता।

जबकि माफी एक छोटा सा शब्द है।

पर शायद गलती मेरी है मैं इसके आकार को जान पाई, पर इसके मूल को ना समझ पाई।

क्योंकि जो शब्द टूटते हुए रिश्तो को जोड़ सकता है, वह कोई छोटा नहीं बल्कि एक बहुत ही बड़ा शब्द होता है।।

रेखा शर्मा, अलवर

आप भी भेजें अपनी रचनाएं

अगर आपको भी लिखने का शौक है तो पत्रिका बनेगा आपके हुनर का मंच। अपनी कविता, रचना अथवा कहानी को मेल आइडी editor.alwar@epatrika.com अथवा मोबाइल नंबर 9057531600 पर भेज दें। इसके आलावा स्कूली बच्चे अपनी चित्रकारी भी भेज सकते हैं। इन सब के साथ अपना नाम, पता, क्लास अथवा पेशा अवश्य लिखें।