
अलवर से एक कविता रोज: एक छोटा सा शब्द, लेखिका- रेखा शर्मा अलवर
माफी एक बहुत ही छोटा शब्द होता है,
पर ना जाने क्यों इंसान उसे बोलने में बरसों लगा देता है।
हम सदैव हर चीज पहले बोलना चाहते हैं,
पर ना जाने क्यों इस शब्द में ऐसा क्या है इससे पहले सुनना चाहते हैं,
जबकि माफी एक छोटा सा शब्द है,
बहुत ही प्रयासों के बाद भी जुबान पर नहीं आता,
ऐसा कितना कठिन है जो बोला ही नहीं जाता।
जबकि माफी एक छोटा सा शब्द है।
पर शायद गलती मेरी है मैं इसके आकार को जान पाई, पर इसके मूल को ना समझ पाई।
क्योंकि जो शब्द टूटते हुए रिश्तो को जोड़ सकता है, वह कोई छोटा नहीं बल्कि एक बहुत ही बड़ा शब्द होता है।।
रेखा शर्मा, अलवर
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Published on:
07 Oct 2020 05:51 pm
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