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107 करोड़ का विश्वविद्यालय भवन लुढ़कने के कगार पर, छात्रों की जान खतरे में

Rajarshi Bhartrihari Matsya University : राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय का 107 करोड़ का नया भवन खतरे में है। भवन के अंदर पानी भर रहा है और दीवारों में दरारें आ रही हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों को चिंता है कि कहीं भवन गिर न जाए। भवन के अंदर पानी भरने का कारण निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी बताया जा रहा है। भवन के चारों ओर एक इंच तक की दरारें आ गई हैं, जिससे पानी रिसाव हो रहा है।

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अलवर

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Manoj Vashisth

Sep 21, 2023

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Rajarshi Bhartrihari Matsya University

Rajarshi Bhartrihari Matsya University : राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय का 107 करोड़ का नया भवन खतरे में है। भवन के अंदर पानी भर रहा है और दीवारों में दरारें आ रही हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों को चिंता है कि कहीं भवन गिर न जाए।

भवन के अंदर पानी भरने का कारण निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी बताया जा रहा है। भवन के चारों ओर एक इंच तक की दरारें आ गई हैं, जिससे पानी रिसाव हो रहा है।

छात्रों का आरोप है कि भवन निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। ठेकेदार को 27 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया है, जबकि भवन अभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं है। हैरत तो ये है कि कागजों में जांच करके सब कुछ विश्वविद्यालय प्रशासन ने सही बताया और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय 27 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। अभी 80 करोड़ रुपए ठेकेदार के खाते में और जाएंगे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में राजभवन को पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

विश्वविद्यालय के नए भवन में ये समस्याएं हैं:

- भवन के अंदर पानी भर रहा है।
- दीवारों में दरारें आ रही हैं।
- निर्माण सामग्री की गुणवत्ता खराब है।
- भवन अभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन समस्याओं के लिए क्या किया है:

- विश्वविद्यालय प्रशासन ने राजभवन को पत्र लिखा है।
- भवन के अंदर पानी निकासी के लिए पंप लगाए जा रहे हैं।
- टेंडर कंपनी से बैठक करने की तैयारी की जा रही है।

छात्रों और अभिभावकों की मांग:

- विश्वविद्यालय प्रशासन को भवन की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए।
- भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
- भवन को छात्रों के लिए सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।

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पूरा प्रकरण राजभवन भेजा पर वहां भी पत्र ठंडे बस्ते में डाला

विश्वविद्यालय के नए भवन में आईं दरारों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से राजभवन को पत्र लिखा, लेकिन राजभवन से इस बारे में कोई जवाब नहीं आया। टेंडर कंपनी की ओर से बैठक करने की बात सामने आ रही है। यह बैठक 4 व 5 सितम्बर को होनी थी, लेकिन बैठक की अब तक दो बार तिथि बढ़ा दी गई है। अभी बैठक की तिथि को आगे बढ़ाया गया है। हैरत की बात ये है कि विश्वविद्यालय के अफसर टेंडर कंपनी पर कार्रवाई करने की बजाय उससे बैठक के जरिए राहत लेने की तैयारी कर रहे हैं। छात्रों व कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विश्वविद्यालय के कुछ लोग इस मामले में मिले हुए हैं। इसमें बड़ा खेल हुआ है। यदि पूरे मामले की जांच हो तो कई पर कार्रवाई होगी। आरोप हैं कि विश्वविद्यालय बिना जांच परख के ही 27 करोड़ की राशि किस हिसाब से जारी कर दी? इसमें कई कई गर्दनें फंस रही हैं।

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