
अलवर में नहीं हो पा रहा महिला शशक्तिकरण, यह है कारण
अलवर. महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर अपने पैरों पर खड़ा करने का सपना दिखाने वाला महिला अधिकारिता विभाग स्वयं पंगु बन गया है। विभाग में अलवर जिला मुख्यालय पर आधे से ज्यादा पद खाली हैं । ऐसे में महिलाओं के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं की ना तो सही प्रकार से मॉनिटरिंग हो पा रही है और ना ही महिलाओं को इन योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है।
वर्षो से खाली है प्रचेताओं के पद
विभाग की ओर से महिलाओं के कल्याण के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन, कौशल विकास कार्यक्रम, सामूहिक विवाह योजना, किशोरी शक्ति योजना, अमृता हाट बाजार, समूहों को राशन की दुकानें देने, स्वरोजगार के लिए ऋण देने, प्रियदर्शनी आदर्श समूह सहित करीब दो दर्जन से अधिक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए पूर्व में प्रचेताओं की नियुक्ति की गई थी। विभागीय आदेश से सभी प्रचेताओं को हटा दिया गया है।
7 में से 4 पद खाली
विभाग में अलवर मुख्यालय के लिए 7 पद स्वीकृत है। इसमें से 4 पद खाली हैं। न यहां कनिष्ठ लिपिक है और न वरिष्ठ लिपिक। कम्प्यूटर प्रोग्रामर भी अवकाश पर है। ऐसे में केवल सहायक निदेशक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं।
आज तक खाली है संरक्षण अधिकारी का पद
विभाग की ओर से घरेलू हिंसा से रोकथाम अधिनियम के तहत महिलाओं को सहायता दी जाती है लेकिन अलवर में इस कानून के तहत संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है।
विभाग के कर्मचारी एक एक के सेवानिवृत होते जा रहे हैं, लेकिन नई भर्ती नहीं हो पा रही है। कर्मचारियों की कमी के चलते काम भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्टाफ नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। अन्य विभाग के सहयोग से काम चलाया जा रहा है।
रिषिराज सिंगल, सहायक निदेशक, महिला अधिकारिता विभाग, अलवर
Published on:
22 Jun 2018, 9:12 AM IST
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