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हजारों साल पुराने द्वापर काल के नीलकंठ महादेव मंदिर में है दुर्लभ शिवलिंग…ये है खूबी

Mahashivratri Special: पौराणिक मान्यता के अनुसार अज्ञातवास के दौरान भगवान कृष्ण की उपस्थिति में द्रौपदी और अर्जुन ने उस नीलकंठ महादेव की प्राण प्रतिष्ठा की। मुगल काल समय में औरंगजेब ने इस प्राचीन शिवालय को क्षतिग्रस्त भी कर दिया।

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हजारों साल पुराना द्वापर काल का नीलकंठ महादेव मंदिर

शुक्रवार को भगवान भोले की कृपा पाने के लिए शिव चतुर्दशी महाशिवरात्रि पर पूरा अलवर जिला भगवान भोले के रंग में रंग गया। अलवर जिले के सरिस्का में द्वापर युग कालीन नीलकंठ महादेव मंदिर पर राजस्थान दिल्ली हरियाणा पंजाब तक के श्रद्धालु आकर महाशिवरात्रि पर पूजन करने आए।


पौराणिक मान्यता के अनुसार अज्ञातवास के दौरान भगवान कृष्ण की उपस्थिति में द्रौपदी और अर्जुन ने उस नीलकंठ महादेव की प्राण प्रतिष्ठा की। मुगल काल समय में औरंगजेब ने इस प्राचीन शिवालय को क्षतिग्रस्त भी कर दिया। सरिस्का क्षेत्र की अरावली पर्वतों के बीचो बीच यह मंदिर है।


इस मंदिर में सवा दो फीट के महादेव एकादश रुद्र के रूप में विराजित हैं। कहां जाता है कि ये स्थान महाभारत काल से है। नीलकंठ महादेव के मंदिर की दीवार देवी देवताओं की मूर्तियों से ही बनी हुई है जो आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।


कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां पूजा अर्चना करता है। उनकी मनोकामना भी पूरी होती है।


इस जगह मौजूद है मंदिर

पौराणिक एवं ऐतिहासिक शिव भक्तों की आस्था का केन्द्र नीलकंठ महादेव मंदिर अलवर के टहला से पश्चिम की ओर 10 कि.मी दूरी पर वर्तमान में ग्राम पंचायत राजोरगढ़ में स्थित है। यह मंदिर अलवर से दक्षिण-पश्चिम को 65 किमी जयपुर से उत्तर पूर्व 120 कि.मी की दूरी पर स्थित है।

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