
कार्तिक मास में मनाया जाने वाला छठ पूजा का पर्व शुक्रवार को नहाय खाय से प्रारंभ होगा। इस पर्व का समापन 20 नवंबर को सप्तमी को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। इसे डाला छठ व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व में पूर्वांचल के लोग सूर्य भगवान व छठी मैया की पूजा करते हैं।
व्रत में होता है 36 घंटे का उपवास: छठी व्रत में भगवान आदिदेव सूर्य नारायण की उपासना निराहार करीब 36 घंटों का उपवास रहकर पूर्ण करते हैं। यह व्रत कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी को सुबह सुर्योदय के बाद पूर्ण होता है। इस व्रत को सबसे पहले त्रेता युग में माता सीता और द्वापर युग में कुंती ने किया था, जो कि सूर्य देव की वरदान से कुंती को कर्ण जैसे शक्तिशाली पुत्र की प्राप्ति हुई। यह पवित्रता के साथ किया जाता है।
मुख्य समारोह
अलवर जिले में छठ पूजा कार्यक्रम मुख्य रूप से पुर्वांचल विकास सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित किया जाता है, समिति के अध्यक्ष लक्षमेश 7 कुमार सिंह ने बताया कि छठ पूजा का मुख्य समारोह सागर पर होगा। इसके अलावा दीवाकरी, मुल्तान नगर, बख्तल की चौकी के पास, बख्तल की चौकी स्थित पंडित का बास, देसूला, अपनाघर शालीमार, शिवाजी पार्क व कालाकुओं में छठ पूजा पर्व मनाया जाएगा।
Published on:
17 Nov 2023 03:15 pm
