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यहां समाज कल्याण विभाग ही बच्चों पर कर रहा अत्याचार

अलवर में समाज कल्याण विभाग के छात्रावास में रह रहे बच्चों से खाना बनवाया जा रहा है। दोनों समय रोटी बना रहे बच्चे।

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अलवर

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Jyoti Sharma

Dec 01, 2017

children cooking food in social welfare department in alwar

पुरानी कहावत चली आ रही है कि आए थे हरि नाम को ओटन लगे कपास । यह कहावत समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों में चरितार्थ होती दिखाई दे रही है।


छात्रावास में रहकर अच्छे से पढाई कर बड़े बनने ख्वाब लिए हजारों बच्चे इन छात्रावासों में शिक्षा ले रहे हैं। सबका सपना है कि कोई मुकाम हासिल करें। लेकिन, छात्रावास पढ़ाई के बजाए वे रोटी-सब्जी बनाने को मजबूर हैं। बच्चों को छात्रावास में रोटियां सेकनी पड़ रही हैं।


जानकारी के मुताबिक सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग ने आदेश जारी कर छात्रावासों में रसाइये के पद पर काम करने वाले दो कर्मचारियों में एक को हटा दिया है। एक रसोइये के जरिए सबका खना बनाना मुश्किल हो गया। समय पर सभी को खाना मिल सके, इसके लिए इन दिनों बच्चों से सब्जी कटवाया जा रहा है वहीं, रोटियां भी सेंक रहे हैं। यही नहीं समय पर चाय-नाश्ता तैयार करने में भी बच्चों को मदद करना पड़ रहा है।

मौके पर यह मिले हालात

राजस्थान पत्रिका की टीम ने जब इन छात्रावासों का अचानक निरीक्षण किया तो कुछ ऐसे ही हालात दिखाई दिए। नया बास स्थित अंबेडकर छात्रावास में 25 बच्चे रहते हैं। यहां पर एक महिलाकर्मी खाना बना रही थी। जबकि एक बच्चा रोटियां सेक रहा था और दूसरा सब्जी काट रहा था। इन्ही में से एक बच्चा सब्जी परोस रहा था। अंबेडकर नगर स्थित बालिका छात्रावास में करीब 75 बालिकाएं रहती हैं । इसमें कॉलेज जाने वाली व स्कूल जाने वाली दोनों ही बालिकाएं शामिल है। यहां कार्यरत महिला कर्मी ने बताया कि मुख्यालय के आदेश के बाद एक रसोइया हटा दिया है अब अकेली से इतनी लड़कियों का खाना बनाना मुश्किल है। इसलिए बालिकाओं की मदद लेनी ही पड़ती है।

फैक्ट फाइल


स्वीकृत छात्रावास 33
संचालित छात्रावास 30
छात्रावास में विद्यार्थियों की संख्या 1300
शहर के छात्रावास 5

इसी पर समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक नवल खान ने कहा कि पहले छात्रावास में दो रसाईये थे, 50 बच्चों पर एक ही रसोइया काम करेगा। इसलिए दूसरे को हटा दिया है। रसोईया ना होने से परेशानी हो रही है इसकी सूचना भी मुख्यालय को दी है।