अलवर

College Election : Video : सरकार के चुनाव से पहले छात्रसंघ चुनाव बना सेमीफाइनल, बडे़ कॉलेजों पर अधिक नजर

हालांकि यह कतई जरूरी नहीं कि विश्वविद्यालयों मंे जो छात्र संगठन अधिक जीत कर आएं और उनसे जुड़ी पार्टी ही प्रदेश में सरकार बनाएगी।

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Aug 21, 2017
Student Elections make Semi final for govt

धर्मेन्द्र यादव. अलवर.

प्रदेश भर के विश्वविद्यालय व राजकीय कॉलेजों में होने जा रहे छात्रसंघ चुनाव को आगामी विधानसभा चुनावों के रुझान का पहला सेमीफाइनल कहा जा सकता है। मतलब विधानसभा चुनाव २०१८ से पहले दो ही छात्रसंघ चुनाव होने हैं। इन छात्रसंघ चुनावों के बाद वर्ष २०१८ के छात्रसंघ चुनाव होंगे, जो आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बनने वाले माहौल को कुछ हद तक सामने लाते हैं।

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हालांकि यह कतई जरूरी नहीं कि विश्वविद्यालयों मंे जो छात्र संगठन अधिक जीत कर आएं और उनसे जुड़ी पार्टी ही प्रदेश में सरकार बनाएगी। इन छात्रसंघ चुनावों केपरिणामों को राजनीतिक पंडित कहीं न कहीं विधानसभा चुनाव के सटीक आकलन करने में जगह देते हैं। यह जरूरी भी है। प्रदेश में कई लाख युवा नए मतदाता के रूप में सामने आते हैं, जो पहले कॉलेज के चुनाव में वोट डालते हैं फिर उन्हें विधानसभा चुनावों में वोट डालने का मौका मिलता है।

चुनाव का प्रचार-प्रसार पोस्टरों से

प्रदेश की तरह अलवर जिले में भी संभावित छात्रसंघ प्रत्याशियों ने प्रचार प्रसार शुरू कर दिया है। खासकर सोशल मीडिया के जरिए। इसके अलावा शहरों में पोस्टर व हॉर्डिंग्स लगाने शुरू हो गए हैं। कॉलेजों के मुख्य द्वार पोस्टर से अटने लग गए हैं। हाल में सभी कॉलेजों ने एक-दो बार पोस्टर हटवाए भी हैं। लेकिन फिर से पोस्टर व दीवारों पर पेंटिंग के जरिए प्रचार जमकर होने लगा है।

११ विधानसभा क्षेत्र, ११ सरकारी कॉलेज

जिले में ११ विधानसभा क्षेत्र हैं और ११ ही सरकारी कॉलेज हैं। सबसे अधिक अलवर शहर में पांच राजकीय कॉलेज हैं। इसके अलावा बहरोड़, तिजारा, राजगढ़, गोविंदगढ़, बीबीरानी व थानागाजी में भी सरकारी कॉलेज हैं। जिलेभर के राजकीय कॉलेजों में ५० हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। ये सभी मतदाता भी हैं, जिस कारण छात्रसंघ चुनावों की अहमियत होने से नकारा नहीं जा सकता।

नेताओं से ली जा रही सलाह

प्रमुख विश्वविद्यालय व जिले के बड़े कॉलेजों में एबीवीपी व एनएसयूआई के टिकट वितरण में पार्टियों के नेताओं का हस्तक्षेप भी सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रत्याशियों को टिकट पार्टी संगठन व प्रमुख नेताओं से सलाह भी ली जा रही है। कुछ नेता पूरा हस्तक्षेप कर रहे हैं।

दो ही छात्र संगठनों का ज्यादा आधार


राजस्थान में एनएसयूआई और एबीवीपी दो ही छात्र संगठनों का ज्यादा आधार है, जो विश्वविद्यालय व कॉलेजों में चुनाव की आधारशिला होते हैं। इन्हीं संगठनों की ओर से प्रत्याशी उतारे जाते हैं। संगठनों की बड़ी लड़ाई तो प्रदेश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में ही होती हैं,जहां संगठनों की ओर से प्रत्याशी घोषित होने से पहले ही प्रचार-प्रसार शुरू हो जाता है।पिछले साल एबीवीपी आगे रही

अलवर जिले में पिछले एनएसयूआई से आगे एबीवीपी रही। एबीवीपी की दो सीट अधिक आई। हालांकि अलवर शहर के बड़े कॉलेजों में करीब-करीब चुनाव परिणाम बराबरी पर रहा था। इस बार दोनों की छात्रसंगठनों के पदाधिकारी पूरी ताकत लगाएंगे। जिताऊ प्रत्याशियों को मैदान में लाने की तलाश तेज हो गई है।

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Published on:
21 Aug 2017 06:53 am
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