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अलवर जिले के हजारों दुग्ध उत्पादक पशुपालकों के लिए जल्द ही बैंकिंग सेवाएं गांव की चौपाल तक पहुंचने वाली हैं। दूध बेचने के बाद भुगतान की राशि निकालने के लिए अब उन्हें बैंक शाखाओं और एटीएम के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सहकारिता मंत्रालय की पहल पर अलवर की दुग्ध सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम स्थापित किए जाएंगे, जिससे पशुपालकों को गांव स्तर पर ही नकद निकासी और अन्य बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
जिले में सक्रिय 1875 प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों में चरणबद्ध तरीके से माइक्रो एटीएम लगाए जाने की तैयारी है। इसके लिए समिति सचिवों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। माइक्रो एटीएम के माध्यम से पशुपालक अपने बैंक खातों से नकद निकासी, बैलेंस जांच और अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे। वर्तमान में दुग्ध समितियों के जरिए दूध का भुगतान सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में जमा होता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भुगतान की राशि गांव में ही उपलब्ध हो सकेगी।
सहकारी समितियों से जुड़े पशुपालकों को जल्द ही बिना ब्याज के डेढ़ लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। इससे पशुपालक दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाकर दुग्ध उत्पादन में इजाफा कर सकेंगे। ऋण की राशि समयबद्ध तरीके से लौटानी होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पशुपालकों की आय बढ़ेगी।
सरस डेयरी की ओर से जिलेभर में ‘बैंक आपके द्वार’ अभियान संचालित किया जा रहा है। डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान ने बताया कि शिविरों के माध्यम से पशुपालकों को जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में खाता खुलवाने, बैंक मित्र बनने, माइक्रो एटीएम के जरिए घर पर भुगतान प्राप्त करने तथा नई दुग्ध सहकारी समितियों के पंजीयन की जानकारी दी जा रही है। यह अभियान 15 जून तक जारी रहेगा।
माइक्रो एटीएम सुविधा शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा। पशुपालकों को भुगतान राशि प्राप्त करने में आसानी होगी और दुग्ध सहकारी समितियों के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ेगा। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और अधिक पशुपालकों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
Updated on:
10 Jun 2026, 11:08 AM IST
Published on:
10 Jun 2026, 11:08 AM IST
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