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Sariska News: सरिस्का में दिखा दुर्लभ ‘गोल्डन सांभर’, तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल

Sariska News: अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में सरिस्का के गंगोरीतोप इलाके में पर्यटकों को एक अत्यंत दुर्लभ 'गोल्डन सांभर' (सुनहरे रंग का सांभर) नजर आया, जिसकी खूबसूरत तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।
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अलवर

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Rajendra Banjara

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Updated: 9 Jun 2026, 12:29 PM IST

golden sambar sariska

सरिस्का में नजर आया ‘गोल्डन सांभर’

Sariska News: राजस्थान के अलवर में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांचित कर देने वाली खबर आई है। सरिस्का क्षेत्र के गंगोरीतोप इलाके में पर्यटकों को एक 'गोल्डन सांभर' (सुनहरे रंग का सांभर) नजर आया। अमूमन गहरे भूरे (डार्क ब्राउन) रंग में दिखने वाले सांभर से अलग, यहां एक बेहद अनोखा सुनहरे रंग का सांभर घूमता हुआ दिखाई दिया।

जैसे ही पर्यटकों की नजर इस चमकीले और खूबसूरत 'गोल्डन सांभर' पर पड़ी, सबने तुरंत अपने कैमरे निकाल लिए। इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीरें और वीडियो अब इंटरनेट पर हर तरफ छाए हुए हैं।

सरिस्का टाइगर कंजर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन के फाउंडर और सेक्रेट्री चिन्मय मैक मैसी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आम तौर पर सांभर का रंग गहरा भूरा होता है, लेकिन इस खास सांभर का रंग बिल्कुल सुनहरा है। ऐसे सुनहरे सांभर वाकई बहुत दुर्लभ होते हैं और इन्हें देखना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

क्यों होता है सांभर का रंग सुनहरा?

सैलानियों को यह अनोखा नजारा दिखाने वाले गाइड विजय कुमार ने बताया कि प्रकृति में ऐसे जीव बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने समझाया कि आनुवंशिक भिन्नता (जनेटिक वेरिएशन) या त्वचा के रंग में होने वाले किसी असामान्य विकार के कारण जीवों का रंग ऐसा हो जाता है।

घने जंगलों के बीच ऐसे सुनहरे रंग वाले सांभर का जिंदा रहना और नजर आना बेहद खास बात है। आपको बता दें कि सरिस्का में इस तरह का अनोखा नजारा पहली बार नहीं दिखा है। कुछ दिनों पहले ही यहां के बफर एरिया में एक अत्यंत दुर्लभ 'सफेद मोर' भी देखा गया था, जिसने सबका ध्यान खींचा था।

बाघों के कुनबे ने भी रचा इतिहास

सरिस्का आज देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है और इसके पीछे यहां का शानदार वन्यजीव प्रबंधन है। कभी मुश्किल दौर से गुजरने वाले इस रिजर्व ने अब एक नया कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। साल 2005 में एक समय ऐसा भी आया था जब शिकार और अन्य वजहों से सरिस्का पूरी तरह बाघ विहीन हो गया था, यानी यहां एक भी बाघ नहीं बचा था। लेकिन प्रशासन, सरकार और वन्यजीव विशेषज्ञों ने हार नहीं मानी।


सरिस्का में बाघों की संख्या 50 के पार

उनके लगातार प्रयासों और बेहतर मैनेजमेंट की बदौलत शून्य से शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंच चुका है। वर्तमान में सरिस्का में बाघों की कुल संख्या 50 के पार पहुंच चुकी है, जो पूरी दुनिया में वन्यजीव संरक्षण और उनके पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) का सबसे बेहतरीन और कामयाब उदाहरण बन गया है। अब इस गोल्डन सांभर के दिखने से सरिस्का की खूबसूरती में एक और नया चांद लग गया है। हर साल सरिस्का घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या में में वृद्धि हो रही है