
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे। पत्रिका फाइल फोटो
Delhi Mumbai Expressway Accidents: अलवर। देश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय बने गए हैं। तय सीमा से अधिक रफ्तार, कमजोर निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे तमाम कारणों से इस एक्सप्रेस-वे पर आए-दिन एक्सीडेंट हो रहे है। इसी वजह से लोग अब इसे एक्सप्रेस-वे की जगह 'डेथ-वे' यानि मौत का रास्ता तक कहने लगे हैं। हर हादसे के बाद रोकथाम के दावे किए गए, लेकिन ये दावे सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकले।
हाल यह है कि रोक के बावजूद इस पर दुपहिया वाहन दौड़ते हैं। आवारा पशु तक एक्सप्रेस-वे पर आ जाते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी और कम समय में लंबी दूरी तय करने के दावे के साथ शुरू किया गया यह एक्सप्रेस-वे सुरक्षा के मोर्चे पर सवालों के घेरे में है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे ने जहां यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाया है, वहीं सुरक्षा मानकों की अनदेखी इसे आम लोगों के लिए खतरनाक भी बना रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हादसों का यह सिलसिला और अधिक भयावह हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन हादसों के लिए तय गति सीमा से अधिक रफ्तार, लेन डिसिप्लेन का पालन न होना और तकनीकी निगरानी की विफलता इसके प्रमुख कारण है। यह परियोजना इस दावे के साथ शुरू की गई थी कि इससे यात्रा का समय घटेगा, व्यापार को गति मिलेगी और सड़क परिवहन सुरक्षित होगा। जिस एक्सप्रेस-वे को सुविधा और रफ्तार का प्रतीक होना था, वह अब लगातार हो रहे हादसों का प्रतीक बनती जा रही है। यह एक्सप्रेस-वे देश के आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक माना जाता है। बीते कुछ दिनों में इस एक्सप्रेस-वे पर हुई दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं है, बल्कि व्यवस्था की असफलता का आईना है।
एएसपी प्रियंका रघुवंशी ने ऐसे हादसों से बचाव के लिए वाहन चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में सीएनजी वाहनों की समय-समय पर फिटनेस और लीकेज जांच कराना बेहद जरूरी है। लंबी यात्रा के दौरान गाड़ी को लगातार चलाने से इंजन और गैस सिस्टम पर दबाव बढ़ता है, जिससे हादसे की आशंका रहती है। बीच-बीच में वाहन रोककर इंजन को ठंडा होने देना चाहिए। साथ ही किसी भी तरह की गैस की गंध, ओवर हीटिंग या तकनीकी खराबी महसूस होने पर तुरंत गाड़ी रोककर जांच कराएं।
-29 अप्रेल की रात अलवर के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कार में आग लगने से इसमें सवार दंपती, उनकी 6 साल की बेटी, सास और सास की बहन जिंदा जल गए। चालक जान बचाने के लिए कार से कूदा, लेकिन वह मौत को नहीं हरा सका। उसे पहले अलवर और फिर जयपुर रेफर किया गया। जयपुर में उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
-14 अप्रेल को अलवर जिले के पिनान इंटरचेंज की पुलिया नंबर 128 को पार करते समय मध्यप्रदेश के उज्जैन से दिल्ली जा रही स्लीपर कोच बस आगे चल रहे ट्रक से टकराने के बाद मिडवे जोन के एंगल से जा टकराई थी। इस हादसे में बस चालक उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद निवासी मोनू यादव (32), उसकी पत्नी रीना (31) व बेटी शक्ति उर्फ डोली (8) की मौत हो गई थी। इस हादसे में 31 यात्री घायल हो गए थे। इनमें से दो घायलों ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।
-20 अप्रेल को बड़ौदामेव क्षेत्र में भटपुरा के समीप एक्सप्रेस-वे पर जयपुर के दादी का फाटक निवासी कारोबारी पुनीत अग्रवाल की कार पिकअप वाहन को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से जा टकराई थी। इस हादसे में कार में सवार 6 जने घायल हो गए थे।
-20 अप्रेल को इसी एक्सप्रेस-वे पर बड़ौदामेव क्षेत्र में पिकअप व ट्रेलर की भिड़ंत में पिकअप चालक भागचंद (32) गंभीर रूप से घायल हो गया था।
-26 अप्रेल को एक्सप्रेस-वे पर गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के लादिया के समीप कंटेनर थाई बीम से टकरा गया था, जिसमें कंटेनर चालक जावेद खान (25) गंभीर रूप से घायल हो गया था।
-14 दिसंबर को इसी एक्सप्रेस-वे पर अलवर जिले के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र में इंदपुर गांव के पास एक कार डिवाइडर से टकरा गई थी। कार में सवार श्योपुर (मध्यप्रदेश) के कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहित चार लोग घायल हो गए थे।
-15 दिसंबर को एक्सप्रेव-वे पर ही हरियाणा के नूंह जिले में 10-12 वाहन टकरा गए थे। हादसे में दो जनों की मौत हो गई थी।
-16 दिसंबर की रात को अलवर जिले के रैणी क्षेत्र से गुजर रहे इस एक्सप्रेस-वे पर अज्ञात वाहन से टकराने के बाद एक पिकअप गाड़ी में आग लग गई थी। पिकअप में सवार तीन युवक जिंदा जल गए थे। घटनास्थल के आसपास एक्सप्रेस-वे पर लगे 11 में से 8 सीसीटीवी कैमरे बंद मिले थे।
Published on:
01 May 2026 09:34 am
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