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जागरूकता के जोर के बाद भी, आखिर क्यों कम रहा मतदान प्रतिशत

अब वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत क्यों नहीं बढ़ा। इसे लेकर चुनाव आयोग और स्थानीय निर्वाचन विभाग भी मंथन कर रहा है

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अब वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत क्यों नहीं बढ़ा। इसे लेकर चुनाव आयोग और स्थानीय निर्वाचन विभाग भी मंथन कर रहा है, कुछ अधिकारी कह रहे हैं कि 23 नवंबर से 27 नवंबर के बीच जिले में 4 हजार से ज्यादा शादियां हुईं। इसलिए, लगभग 2 लाख मतदाता शादियों में व्यस्त थे और मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच सके।

अगर ये वोटर सामने आते तो मतदान प्रतिशत 4 से 5 फीसदी तक बढ़ सकता था. लेकिन अभी ये सब सिर्फ अटकलें हैं। आयोग कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच करेगा और अगले चुनावों के लिए उन पर काम करेगा। चुनाव आयोग ने प्रदेश में मतदान की तिथि 23 नवंबर को तय की थी। ये शादी के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त माना जाता है। आयोग को इसकी खबर लगी। खुद सोचा कि वोट प्रतिशत इससे प्रभावित होगा।

लोगों को भी परेशानी हो सकती है। इसी को देखते हुए 25 नवंबर शादी की तिथि की गई। एक प्रशासनिक अफसर का कहना है कि चुनाव की तिथि में बदलाव जरूर किया गया लेकिन उस दौरान शादियां आसपास काफी रही हैं। लोग दूसरे राज्यों के अलावा दूसरे जिलों में भी पहुंचे हैं। इसका असर सीधा मतदान प्रतिशत पर पड़ा। उस दिन मौसम भी अच्छा रहा, बावजूद इसके कई बूथों पर भीड़ नहीं पहुंची। इसका शादी सीजन ही बड़ा कारण है।

होम वोटिंग के सर्वे पर भी खड़े हुए सवाल

थानागाजी, अलवर ग्रामीण, बहरोड़ एरिया में बूथों की दूरियां लोगों से दूर रहीं। इससे भी कुछ वोटर नहीं आए। कुछ लोगों के नाम होम वोटिंग में नहीं थी जबकि वह बूथों तक पहुंचने में अक्षम थे। परिवार के लोग कुछ वोटरों को चारपाई पर लेकर पहुंचे थे। बताते हैं कि होम वोटिंग का सर्वे ठीक से होता और बीएलओ की ओर से फार्म भरवाया जाता तो होम वोटिंग में और लोग आते। इससे वोटिंग अधिक होती।

हालांकि होम वोटिंग के दौरान अफसरों को दिक्कतें भी काफी आईं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले चुनाव में देवउठनी चुनाव से 15 दिन पहले थी। ऐसे में मत प्रतिशत पर कम असर आया। हालांकि वर्ष 2013 की तुलना में करीब 3 फीसदी तक मतदान कम हुआ था।