
परीक्षा से पहले बच्चों को हो रही यह परेशानी, परिजन परेशान, पढे़ यह खबर
जिसके चलते पढ़ा हुआ भूलने लगे हैं। इतना ही नहीं तनाव के चलते नींद भी नहीं आ रही हैं। सामान्य चिकित्सालय के मनो चिकित्सा विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन तीन से चार प्रकरण इस तरह के आ रहे हैं। जिसमें मनोचिकित्सक बच्चों की काउंसलिंग कर रहे हैं।
एग्जाम फोबिया के लक्षणबच्चों में डिप्रेशन होनाख्, नींद ना आना, पढ़ाई में मन नहीं लगना, काम करने में मन नहीं लगना, घबराहट होना, याददाश्त कम होना, सिर दर्द होना, धडकन तेज होना, थकान होना, चिड़चिडा रहना, किसी भी काम में मन नहीं लगना। बार बार मरने का विचार आना।
लक्षण दिखने पर क्या करना चाहिए
अध्यापकों और अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों पर पढ़ाई का दबाव अधिक ना डाले। बच्चों को पॉजिटिव सोच के साथ पढ़ने को कहें। परिणाम को लेकर डराएं नही। कक्षा में या मौहल्ले के अन्य बच्चों के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। ऑनलाइन डिजिटल स्टडी की बजाय पुस्तकों को पढने के लिए प्रेरित करें।
केस -1मेरी इस साल दसवीं की परीक्षा है, सारी तैयारी हो चुकी है लेकिन फिर भी लग रहा है कि मुझे कुछ याद नहीं। इसलिए बहुत टेंशन हो रही है, पता नहीं परीक्षा कैसी होगी यही चिंता सता रही है।
सुहाना गोयल, विद्यार्थी
केस -2मेरी इस साल बारहवीं की परीक्षा है जो अगले सप्ताह शुरू होगी। परीक्षा नजदीक है। मुझे चिंता से नींद नहीं आ रही है। परीणाम क्या रहेगा। यही डर सता रहा है। कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है।
रोहित कुमार, विद्यार्थी
एग्जाम फोबिया से ग्रसित बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है। परीक्षा के दौरान बच्चे तनाव लेते हैं और डिप्रेशन में चले जाते हैं। इससे याद किया हुआ भी भूल जाते हैं। इससे बचने के लिए भरपूर नींद लें और खाने पीने का ध्यान रखे। तनाव ना ले।
नरेंद्र सिंडोलिया , मनो चिकित्सक, सामान्य चिकित्सालय, अलवर।
Updated on:
02 Mar 2024 12:07 pm
Published on:
02 Mar 2024 12:06 pm
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