
आजकल बच्चे अपने फोन से बहुत अधिक जुड़ रहे हैं और यह उनके दिमाग के साथ खिलवाड़ कर रहा है। यह न केवल उनके शारीरिक विकास को अवरुद्ध कर रहा है, बल्कि माता-पिता अपने बच्चों के रोने पर उन्हें तुरंत चुप कराने के लिए फोन का उपयोग कर रहे हैं। निश्चित रूप से, स्क्रीन पर बहुत अधिक समय बिताना उनकी मानसिक शक्ति के साथ गंभीर रूप से खिलवाड़ है। विशेषज्ञ यहां तक कह रहे हैं कि फोन और टीवी पर समय बिताने से स्वलीनता (ऑटिज्म) में वृद्धि हो रही है।
आभाषी स्वलीनता (ऑटिज्म) क्या होता है ?
स्वलीनता (ऑटिज्म) मस्तिष्क के विकास के दौरान होने वाला विकार है जो व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार और संपर्क को प्रभावित करता है। हिन्दी में इसे 'आत्मविमोह' और 'स्वपरायणता' भी कहते हैं। इससे प्रभावित व्यक्ति, सीमित और दोहराव युक्त व्यवहार करता है जैसे एक ही काम को बार-बार दोहराना।
छोटे बच्चों में दिख रहे लक्षण: सामान्य अस्पताल के ओपीडी स्थित मनोरोग विभाग में प्रतिदिन करीब 50 मरीज आते हैं। हालांकि आभाषी स्वलीनता (ऑटिज़्म) के ज़्यादा मामले नहीं हैं, लेकिन 3 से 3.25 साल के बच्चों में कुछ लक्षण देखे जाते हैं। इससे उनकी बोलने की क्षमता में देरी होती है और उनका आईक्यू भी सामान्य बच्चों की तुलना में कम होता है। ये बच्चे दूसरों से बात करने और नज़रें मिलाने से बचते हैं, जिससे उनके लिए घुलना-मिलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि आभाषी स्वलीनता का कोई इलाज नहीं है, लेकिन व्यक्तित्व विकास थेरेपी, स्पीच थेरेपी और विशेष शिक्षा थेरेपी इसे कुछ हद तक रोकने में मदद कर सकती हैं।
ये हो रहा नुकसान
बच्चों का शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स का बहुत अधिक उपयोग करने का मतलब है कि वे उतने सक्रिय नहीं हैं जितना उन्हें होना चाहिए। और यह उनके शारीरिक विकास के लिए अच्छा नहीं है। इसके अलावा, उन्हें चिड़चिड़े होने और स्कूल में अच्छा प्रदर्शन न करने की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है।
बच्चों की मोबाईल की लत कैसे छुड़ाएं ?
बच्चे के फोन का लत को छुड़ाने के लिए आपको भी खुद पर थोड़ा कंट्रोल करना पड़ेगा। आपको यदि अपने बच्चे के फोन को सीमित करना है तो खुद के फोन चलाने का समय भी निर्धारित करना पड़ेगा। क्योंकि बच्चा जो देखता है वही सीखता है। बच्चे के फोन चलाने को कंट्रोल करने के लिए उसे केवल कुछ समय निर्धारित करके ही फोन दें।
Published on:
18 Nov 2023 12:02 pm
