
पनियाला- बड़ौदामेव नेशनल हाइवे की अभी किसानों को नहीं मिली राशि
अवाप्त जमीन का अवार्ड पारित
नेशनल हाइवे निर्माण के लिए छह तहसीलों की अवाप्त की जाने वाली जमीन का अवार्ड जारी हो चुका है, लेकिन अभी नेशनल हाइवे अथोरिटी से मुआवजा वितरण के राशि का आवंटन नहीं हो सका है। इस कारण किसानों को मुआवजे का इंतजार है।
तीन जिलों की बनेगी लाइफ लाइन
राज्य सरकार की ओर से अलवर को तीन जिलों में बांटने के बाद पनियाला- अलवर- बडौदामेव नेशनल हाइवे कोटपूतली, खैरथल एवं अलवर जिले की लाइफलाइन साबित होगा। तीनों जिलों की कनेक्टिविटी इसी हाइवे से जुड़ सकेगी। कारण है कि यह हाइवे बानसूर के 15, मुण्डावर के 9, किशनगढ़बास के 2, अलवर के 18, रामगढ़ के 9 व लक्ष्मणगढ़ तहसील के 2 गांवों से होकर निकलेगा। यानी तीनों जिलों की कनेक्टिविटी में यह नेशनल हाइवे बड़ी भूमिका निभाएगा।
जमीन का कब्जा लेने में हो सकती है देरी
खास बात यह कि आगामी दो महीनों में किसानों को मुआवजे का वितरण होकर जमीन का कब्जा नहीं लिया जा सका तो करीब चार महीने जमीन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। कारण है कि अभी किसानों की जमीन खाली है और मुआवजे का भुगतान कर जमीन का कब्जा लेना आसान है। वहीं मानसून शुरू होते ही खेतों में फसल की बुवाई होगी और फसल के दौरान मुआवजा देने के बाद भी जमीन का कब्जा लेना मुश्किल हो जाएगा।
55 गांवों से गुजरेगा
पनियाला- अलवर- बडौदामेव नेशनल हाइवे तीनों जिलों के 55 गांवों से गुजरेगा। इन 55 गांवों के लोगों के लिए यह नेशनल हाइवे रोजगार सृजन का बड़ा स्रोत बन सकेगा। कारण है कि यह नेशनल हाइवे जमीन पर होकर निकलेगा। इस कारण रोड के दोनों ओर बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन हो सकेगा। वहीं औद्योगिक, व्यावसायिक एवं शैक्षिक हब भी विकसित हो सकेंगे।
मुआवजे के फेर में अटक न जाए कहीं तीन जिलों की कनेक्टिविटी!
जमीन पर हाइवे बनने से हजारों की संख्या में नए रोजगार का होगा सृजन
Published on:
29 Apr 2023 06:42 am
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