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मिट्टी की जांच के लिए किसान हो रहे थे परेशान

अलवर. कृषि विभाग के कागजों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं तो हैं लेकिन उनका संचालन नहीं हो पा रहा था। अब महकमा जागा और दो प्रयोगशालाएं शुरू करवाई हैं। इससे किसानों की दौड़भाग कम होगी। अप्रेल माह से किसान खैरथल व राजगढ़ में ही मिट्टी की जांच करवा सकेंगे। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं के संचालन लेकर राजस्थान पत्रिका ने चार जनवरी को मुद्दा उठाया था। किसानों की पीड़ा को भी सामने रखा। उसके बाद अधिकारियों पर दबाव पड़ा तो कृषि विभाग के अधिकारी जागे और उन्होंने मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के संचालन की योजना ब

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अलवर

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jitendra kumar

Mar 12, 2023

मिट्टी की जांच के लिए किसान हो रहे थे परेशान

मिट्टी की जांच के लिए किसान हो रहे थे परेशान

अलवर. कृषि विभाग के कागजों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं तो हैं लेकिन उनका संचालन नहीं हो पा रहा था। अब महकमा जागा और दो प्रयोगशालाएं शुरू करवाई हैं। इससे किसानों की दौड़भाग कम होगी। अप्रेल माह से किसान खैरथल व राजगढ़ में ही मिट्टी की जांच करवा सकेंगे।

मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं के संचालन लेकर राजस्थान पत्रिका ने चार जनवरी को मुद्दा उठाया था। किसानों की पीड़ा को भी सामने रखा। उसके बाद अधिकारियों पर दबाव पड़ा तो कृषि विभाग के अधिकारी जागे और उन्होंने मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के संचालन की योजना बनाई। दो मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का संचालन हो गया। इन पर अनुसंधान अधिकारियों की तैनाती कर दी गई। दो प्रयोगशालाओं के संचालन के लिए भी योजना बना ली गई है लेकिन वहां स्टाफ नहीं है। संचालित प्रयोगशालाओं में राजगढ़ व खैरथल शामिल हैं। यहां एक-एक प्रयोगशाला सहायक की तैनाती होना और बाकी है।

जिला कृषि अनुसंधान अधिकारी एसपी यादव ने बताया कि राजगढ़ और खैरथल में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला अगले माह अप्रेल से शुरू हो जाएंगी। किसान यहां मिट्टी की जांच करवा सकेंगे।

अलवर प्रयोगशाला पर भार होगा कम

मिट्टी परीक्षण केंद्र अलवर को वर्ष 2022-2023 में 12 हजार जांचों का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष 18 हजार नमूनों की जांच हुई। लगातार यहां का भार बढ़ रहा था। अब दो प्रयोगशालाओं के शुरू होने से यह भार कम होगा। बहरोड़ में संचालित प्रयोगशाला में पांच हजार से अधिक जांचें हो चुकी हैं।

मिट्टी होती जा रही है बंजर
मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए किसान अंधाधुंध रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वह समय-समय पर मिट्टी की जांच करवाएं। वैज्ञानिकों का सुझाव है कि किसान कम रासायनिक खादों का कम प्रयोग करें। अधिक प्रयोग से पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ ही खेत भी बंजर होते जा रहे हैं। जिले की मिट्टी में नाइट्रोजन, जिंक, आयरन और ऑर्गेनिक कार्बन तत्वों की कमी है। इससे जिले की मिट्टी में लवणता बढ़ रही है।