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Alwar: सरकारी दफ्तरों की छतें जर्जर, बारिश में भीग जाता है रिकॉर्ड, पर जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे

बारिश सिर पर है और जर्जर भवनों में चल रहे सरकारी कार्यालयों में बैठे कार्मिकों को सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। नौतपा में हुई बारिश में ही जर्जर भवनों की छतों से पानी टपक गया तो बारिश के सीजन में क्या हाल होगा। प्रशासन सोया पड़ा है और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे है। शायद इन्हें किसी अनहोनी का इंतजार है।

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अलवर

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Umesh Sharma

Jun 03, 2026

city palace alwar

जर्जर हालत में है सिटी पैलेस

एक ओर सरकार सुशासन, डिजिटल रिकॉर्ड और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर अलवर शहर के कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय खुद अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि बरसात शुरू होते ही इन भवनों की छतें टपकने लगती हैं। दीवारों में सालभर सीलन बनी रहती है और कई जगह प्लास्टर गिरने की घटनाएं आम हो गई हैं। विडंबना यह है कि जिन भवनों में आमजन को न्याय, सुरक्षा और प्रशासनिक सेवाएं मिलनी चाहिए, वहीं लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। लाखों रुपए के सरकारी रिकॉर्ड भी पानी और सीलन की भेंट चढ़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद नहीं टूट रही।

बारिश में अंदर घुसना भी मुश्किल

शहर के महिला थाने की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। बरसात के मौसम में यह थाना पानी से लबालब हो जाता है। यहां लगभग हर कमरे में सीलन की समस्या बनी हुई है। कई स्थानों पर रिकॉर्ड पहले ही खराब हो चुका है। बारिश के दौरान यहां नदी की तरह पानी बहता है। महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए इस महत्वपूर्ण संस्थान की यह हालत प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण है।

जनाना अस्पताल में भी हालात बदतर

जनाना अस्पताल भी बदहाल भवनों की सूची में शामिल है। अस्पताल के गलियारों का प्लास्टर उखड़ चुका है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन बैठते हैं, लेकिन सिर के ऊपर से प्लास्टर गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। कई बार प्लास्टर झड़ने की घटनाएं भी हो चुकी हैं, इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। जिन कमरों में प्रसूताओं को भर्ती रखा जाता है, उस भवन के चारों तरफ का प्लास्टर उखड़ चुका है।

सामान्य अस्पताल में समस्या सुलझाने की कवायद

जिले के सबसे बड़े सामान्य अस्पताल में भी जलभराव की समस्या है। यहां तेज बारिश होते ही पोर्च में पानी भर जाता है। हालांकि इस बार यहां पानी निकासी के इंतजाम किए जा रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि बारिश में पानी नहीं भरेगा। हालांकि अस्पताल के एंट्री गेट पर नालों की सफाई नहीं होने बारिश में पानी भर जाता है।

44 स्कूलों पर लगाया ताला, डीईओ कार्यालय भी जर्जर

झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिलेभर के 44 स्कूलों को जर्जर होने की वजह से ताला लगा दिया गया है। कई स्कूलों का दोबारा सर्वे कराया जा रहा है। ये भी जर्जर मिले तो ताला लगाया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी एक कमरा जर्जर है, जिस पर सील लगा दी गई है। यह भवन जर्जरावस्था में है। दो बार प्रस्ताव देने के बाद भी इसे नहीं सुधारा गया।