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नीमराणा-कोटकासिम में फिर जगी एयरपोर्ट की आस: उद्यमियों की दिल्ली-जयपुर की दौड़ होगी खत्म 

औद्योगिक हब नीमराणा और कोटकासिम के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रशासन द्वारा जमीन की फिजिबिलिटी रिपोर्ट दोबारा तैयार की जा रही है, जिससे भिवाड़ी और नीमराणा के हजारों उद्यमियों के लिए दिल्ली-जयपुर की दौड़ खत्म होने की उम्मीद जगी है।

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Representative picture (AI)

कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा जिले के निवासियों और उद्यमियों को इस साल बड़ी सौगात मिल सकती है। कोटकासिम में साल 2012-13 में मंजूर हुए लेकिन जमीन विवादों में फंसे 'ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट' प्रोजेक्ट की फाइलें एक बार फिर खुल गई हैं। यदि इस बार जमीन का चयन फाइनल हो जाता है, तो इस क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

13 साल का लंबा इंतजार अब होगा खत्म?

कोटकासिम में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और एयरोसिटी बनाने की योजना यूपीए सरकार के समय 2012-13 में स्वीकृत हुई थी। उस समय शर्त थी कि एयरपोर्ट के लिए केवल बंजर जमीन का ही उपयोग किया जाएगा। करीब एक साल की तलाश के बाद भी उपयुक्त बंजर भूमि नहीं मिल पाने के कारण यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अधर में लटक गया था। लेकिन अब बदलती औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए सरकार और नागरिक उड्डयन विभाग ने इसकी फिजिबिलिटी (व्यवहार्यता) को दोबारा परखना शुरू कर दिया है।

सबसे ज्यादा फायदा: 900 से अधिक उद्योगों को मिलेगी रफ़्तार

इस एयरपोर्ट के बनने से सर्वाधिक लाभ नीमराणा, भिवाड़ी और मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (MIA) के उद्यमियों को होगा। आंकड़ों के मुताबिक नीमराणा और भिवाड़ी में लगभग 693 बड़े और मध्यम उद्योग संचालित हैं। साथ ही MIA अलवर में करीब 200 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। वर्तमान में, विदेशी निवेशकों या कंपनी के बड़े अधिकारियों को यहाँ आने के लिए दिल्ली (IGI) या जयपुर एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है। सड़क मार्ग से लगने वाले 3-4 घंटे के समय के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। एयरपोर्ट बनने से निवेशकों की पहुंच आसान होगी और क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा।

एयरोसिटी से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

प्रस्तावित योजना में केवल रनवे ही नहीं, बल्कि एक पूरी 'एयरोसिटी' विकसित करने का खाका है। इससे न केवल विमानन सेवाएं शुरू होंगी, बल्कि होटल इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में भी हजारों नए रोजगार पैदा होंगे। प्रशासन अब ऐसी जमीन की तलाश में है जो तकनीकी मानकों पर खरी उतरे और जिससे किसानों को भी कम से कम विस्थापन का सामना करना पड़े। अब सबकी निगाहें फिजिबिलिटी रिपोर्ट और जमीन के अंतिम चयन पर टिकी हैं। अगर इस बार जमीन फाइनल हो जाती है, तो खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों के विकास को पंख लग जाएंगे।

कोटकासिम, नीमराणा आदि जगहों पर एयरपोर्ट के लिए फिजिबिलिटी देखी जा रही है। जैसे ही जमीन मिलेगी, तो प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे - भूपेंद्र यादव, केंद्रीय वन मंत्री