
किराए की सुरंग से राजस्थान पुलिस को गच्चा दे रहे हैं खूंखार अपराधी, अपराध करने के बाद यहां हो रहे गायब
अलवर. यदि आप किसी को कमरा या मकान किराए पर दे रहे हैं तो सावचेत रहें। शहर सहित जिलेभर में कई अपराधी किराए मकानों में रहकर वारदातों का अंजाम दे रहे हैं। कुछ अपराधी वारदात करने के बाद किराए पर रहने वाले अपने मिलने-जुलने वालों के पास शरण ले रहे हैं। पुलिस की पड़ताल और खुलासों में ऐसे सैकड़ों में मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद न पुलिस सतर्क है और न आमजन जागरुक।
शहर में पिछले कुछ महीनों से लगातार महिलाओं के गले से चेन स्नेचिंग की वारदातें हो रही हैं। भिवाड़ी थाना पुलिस ने पिछले दिनों अंतरराज्यीय गिरोह के चार जनों को गिरफ्तार कर चेन स्नेचिंग की 28 वारदातों का खुलासा किया था जिनमें से करीब 10 चेन स्नेचिंग की वारदात अकेले शहर कोतवाली थाना क्षेत्र की थी। कोतवाली थाना पुलिस के जांच अधिकारी की लापरवाही से गिरोह का मास्टर माइंड आबिद पुलिस चंगुल से बच निकला और अन्य साथियों के साथ मिलकर वारदातें कर रहा है।
पुलिस को संदेह है कि पिछले दिनों आबिद ने ही एनईबी थाना क्षेत्र में दो चेन लूट की वारदातों का अंजाम दिया। पड़ताल में सामने आया कि बदमाश अपाची बाइक से शहर में आते हैं। यहां किराए पर रहने वाले अपने दोस्तों के पास जाते हैं। उनकी दूसरी बाइक लेकर शहर में चेन स्नेचिंग की वारदात करते हैं और उसके बाद वापस अपने दोस्तों के कमरे पर चले जाते हैं। कुछ घंटों बाद पुलिस की नाकेबंदी ठण्डी पडऩे के बाद अपनी बाइक उठाकर रवाना हो जाते हैं।
नहीं कराते वैरिफिकेशन
नियमानुसार किरायेदारों का पुलिस वैरिफिकेशन कराना अनिवार्य है, लेकिन जिले में पुलिस की ढिलाई और आमजन की सुस्ती के कारण ऐसा नहीं हो रहा है। किरायेदार रखने से मकान मालिक को सम्बन्धित पुलिस थाने से किरायेदारों का पुलिस वैरिफिकेशन फार्म लेकर किरायेदार से भराना होता है जिसमें किरायेदार की फोटो, आईडी सहित समस्त जानकारी भरी जाती है। उसके बाद उक्त फार्म को थाने में जमा कराना होता है जिसके आधार पर पुलिस किरायेदार का वैरिफिकेशन करती है। लोग बिना पुलिस वैरिफिकेशन कराए ही अपना मकान व कमरा किराए पर दे देते हैं जिसके कारण अपराधियों को छिपने या रहने के लिए आसानी से ठिकाना मिल जाता है।
फिर डोर-टू-डोर भटकती है पुलिस
किरायेदारों का वैरिफिकेशन नहीं होने का खामियाजा और मशक्कत पुलिस को बड़ी वारदात होने पर झेलनी पड़ती है। फिर अपराधी को पकडऩे के लिए पुलिस डोर-टू-डोर सर्वे करती है। शहर में करीब चार साल पहले कालीमोरी फाटक के समीप स्थित बिजली निगम कार्यालय के गेट पर कैशियर और गार्ड को गोली मारकर बदमाश लाखों रुपए लूट ले गए थे। जिसमें बदमाशों की तलाश में पुलिस को पूरे आसपास क्षेत्र में डोर-टू-डोर सर्वे करना पड़ा। इसी प्रकार शहर के बहुचर्चित मामले पत्नी की हत्या कर शव के टुकड़े कर शहर में विभिन्न स्थानों पर फेंकने की घटना में भी पुलिस को अपराधी को पकडऩे के लिए शहरभर में धूल फांकनी पड़ी थी।
यों दे रहे गच्चा
चेन स्नेचिंग व लूटपात की वारदात को अंजाम देने के लिए बदमाश अक्सर 150 से 200 सीसी इंजन वाली पल्सर या अपाची बाइक इस्तेमाल करते हैं। इस लिहाज से ये दोनों बाइक बदनाम हो चुकी हैं। अब जब भी कोई ऐसी वारदात होती है तो सबसे पहले पुलिस पल्सर या अपाची बाइक की छानबीन शुरू कर देती है, लेकिन बदमाशों ने पुलिस को गच्चा देने के लिए नया तरीका निकाल लिया है। वह आते तो इन्हीं बाइकों से हैं, लेकिन वारदात अपने किसी अन्य साथी की सीडी डीलक्स बाइक से करते हैं जिससे कि पुलिस गच्चा खा जाए और वह सेफ निकल जाए।
किरायेदारों के पुलिस वैरिफिकेशन और अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस आगामी दिनों में जनसहभागिता अभियान चलाएगी। साथ ही संदिग्ध लोगों को चिह्नित करने के लिए जिलेभर में डोर-टू-डोर अभियान भी चलाया जाएगा।
-राजेन्द्र सिंह, जिला पुलिस अधीक्षक, अलवर।
Published on:
04 Aug 2018 08:49 am
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