
अलवर.
सरिस्का में बाघों का कुनबा जिस अनुपात में बढ़ा है, उस हिसाब से निगरानी तंत्र मजबूत होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों के पद रिक्त होने की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है। लंबे समय से कई पद खाली पड़े हैं, लेकिन विभाग के आला अफसरों का इस पर कोई ध्यान नहीं है। हालत यह है कि मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) का पद पिछले छह महीने से रिक्त चल रहा है, लेकिन इस पद पर किसी को भी नहीं लगाया गया। इसी तरह उप वन संरक्षक (डीसीएफ) का पद भी दो महीने से खाली चल रहा था, जिस पर बुधवार को ही अभिमन्यू सिंह ने कार्यभार ग्रहण किया है। उधर, वन संरक्षक पद पर भी लंबे समय बाद संग्राम सिंह ने पदभार ग्रहण किया है।
सरिस्का वनक्षेत्र का इलाका बहुत बड़ा है, लेकिन यहां केवल फॉरेस्ट गार्ड की संख्या केवल 102 है। जबकि इलाके के अनुसार इनकी संख्या दोगुनी होनी चाहिए। इसमें कई फॉरेस्ट गार्ड जंगल के अलावा सरिस्का के गेट व अन्य जगहों पर भी तैनात है, जिसकी वजह से निगरानी तंत्र कमजोर हो रहा है।
सरिस्का में वनपाल के 20 पद स्वीकृत थे, लेकिन वन विभाग 8 पद घटाकर किसी और डिविजन को दे दिए। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं सहायक वनपाल के सभी 17 पद भरे हुए है, लेकिन इनकी संख्या भी क्षेत्र के अनुसार कम है। इनमें भी बढ़ोतरी की जरूरत है।
रेंजर के स्वीकृत 11 पदों में 10 भरे हैं। लेकिन टाइगर रिसर्च केंद्र पर स्थाई रेंजर नहीं है। एक ही व्यक्ति कार्यवाहक एसीएफ है। इसके पास ही अनुसंधान केंद्र के रेंजर और टूरिज्म रेंजर का कार्यभार है। इससे भी काम प्रभावित हो रहा है। टाइगर रिसर्च केंद्र के रेंजर की ओर से ही टाइगर पर नजर रखी जाती है। उसके व्यवहार में परिवर्तन को लेकर आगे तक बात पहुंचाई जाती है।
सरिस्का टाइगर कंजर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन के सचिव चिन्मय मक मैसी ने बताया कि दोनों वनमंत्री अलवर से ही है। अगर यहां पदों में इतना झोल है तो अन्य टाइगर रिजर्व के बारे में सोचा जा सकता है कि क्या हाल होगा ?
सरिस्का के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने साफ चुकी है कि सरिस्का के संरक्षण के लिए 350 पदों पर भर्ती अतिआवश्यक है। सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक यह करनी होगी। राज्य सरकार की विशेष अधिकार समिति भी पहले सिफारिश कर चुकी है। इसमें एक सहायक वन संरक्षक, 3 रेंज वन अधिकारी और 81 वन रक्षक के पदों का सृजन किया था। इनमें 27 वन रक्षक एनजीओ के जरिए भी भर्ती करने का प्रावधान किया गया, लेकिन भर्तियां नहीं हो सकी। इस कमेटी ने संवेदनशील घने वन क्षेत्रों के लिए हर चार वर्ग किलोमीटर पर एक वनरक्षक और हर चार वनरक्षकों पर एक वनपाल और हर तीन वनपालों पर एक रेंज अधिकारी की आवश्यकता बताई थी। इस हिसाब से अभयारण्य को अकेले सुरक्षा गतिविधियों के लिए 304 वनरक्षकों की आवश्यकता होगी।
Published on:
29 Aug 2024 11:23 am
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