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सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवा में…रैणी, बहरोड़, टहला, झिरी में लगातार अवैध खनन

illegal mining news अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश हर जगह पहुंच चुके है, लेकिन अलवर में अरावली की पहाड़ियों को माफिया लगातार छलनी कर रहे हैं।

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घीलोठ के पहाड़ में अवैध खनन - पहाड़ ही खत्म (फोटो - पत्रिका)

illegal mining news अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश हर जगह पहुंच चुके है, लेकिन अलवर में अरावली की पहाड़ियों को माफिया लगातार छलनी कर रहे हैं। खान विभाग पर गंभीर आरोप हैं कि कमीशनबाजी के चलते माफिया को संरक्षण दे रहे हैं। रैणी, बहरोड़, टहला, झिरी से लेकर अन्य एरिया में अवैध खनन नहीं रुक रहा है। खनन अभियंता मनोज शर्मा यही कह रहे हैं कि वह एक्शन ले रहे हैं, लेकिन अवैध खनन बदस्तूर जारी है। जानकारों का कहना है कि इंजीनियरों का बदलाव नहीं किया गया, तो अरावली को और नुकसान होगा। क्योंकि उनका गठजोड़ माफिया से बना हुआ है।

बहरोड़ के कई गांव अवैध खनन की चपेट में

बहरोड़ क्षेत्र के जखराणा, निभोर, नालौता, खोहर, घीलोठ, रैवाणा और बेलनी जैसे गांवों में अवैध खनन का कारोबार हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार इन इलाकों में सुबह से लेकर रात के अंधेरे तक सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अवैध रूप से पत्थर भरकर दौड़ती नजर आती हैं। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पहाड़ों का सीना चीर रहे हैं।

हैवी ब्लास्टिंग से मकानों में दरार

पत्थरों को तोड़ने के लिए अवैध रूप से शक्तिशाली विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन धमाकों से न केवल आसपास के गांवों के मकानों में दरारें आ रही हैं, बल्कि पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति हो रही है। जखराणा व निभोर के पहाड़ समतल हो चुके हैं। नालौता व खोहर में अवैध रास्तों के जरिए पत्थरों की ढुलाई की जा रही है।

रैणी में यह हाल

रैणी क्षेत्र के गांव जामडोली, खुर्द, ग्वाडान, भूड़ा, उकेरी, टहटड़ा आदि जगहों पर अवैध खनन किया जा रहा है। खान विभाग से लेकर वन विभाग,राजस्व विभाग सभी मिलकर संरक्षण दे रहे हैं। इन क्षेत्रों के लोगों ने तमाम बार अवैध खनन का विरोध किया, लेकिन माफिया जनता को धमकी देते हैं और प्रशासन जनता के साथ खड़ा नहीं रहता।