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अलवर: आपकी बेटी की उम्र 10 से 17 साल के बीच है और वह मेकअप की ओर अधिक आकर्षित होती है तो मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। हालांकि, यह बीमारी नहीं, लेकिन सामाजिक सिंड्रोम है।
इस प्रवृत्ति को मनोविज्ञानी सेफोरा किड्स कहते हैं। बच्चियां टीवी, वेबसीरीज और विज्ञापनों में अपनी उम्र की लड़कियों को देख उनसे प्रभावित हो, वैसी नजर आना चाहती हैं। इसके लिए वे छोटी उम्र में ही पूरा मेकअप करने लगती हैं।
सेफोरा किड शब्द का प्रयोग उन नाबालिग लड़कियों के लिए किया जाता है, जो मेकअप और ब्यूटी उत्पादों की दीवानी होती हैं। ग्लैमरस दिखना चाहती हैं। डिजिटल युग में पली-बढ़ी हैं। जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया से प्रभावित हैं।
अलवर शहर की 11 साल की एक बच्ची को डरावने सपने आते थे। परिजन उसे मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले गए। केबिन में बैठी यह बच्ची बार-बार वहां लगे आइने में अपना चेहरा देख रही थी।
पूछने पर उसकी मां ने बताया कि हमारी बेटी दिनभर मेकअप करती रहती है, मानती नहीं है। इस पर मनोरोग विशेषज्ञ ने परिजनों को बताया कि यह कोई बीमारी नहीं। बचपन में इस तरह का शौक लगना, सामाजिक सिंड्रोम की तरह है।
-कॅरियर पर ध्यान न दे पाना।
-मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव।
-असमय व्यस्कता की ओर धकेलना।
-आत्मस्मान-पहचान की समस्याएं।
-बच्चों में आत्मविश्वास जगाएं।
-उन्हें बताएं जो स्क्रीन पर दिखाया जाता है, वह हमेशा सच नहीं होता।
-मोबाइल, सोशल मीडिया और टीवी की लत भी न लगने दें।
-बच्चों के लिए समय निकालें।
यदि कोई नाबालिग मेकअप की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रही है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। उसके साथ ऐसा कब से हो रहा है, इसकी मॉनिटरिंग करनी होगी। यदि 15 साल के बाद कोई बच्ची मेकअप अधिक कर रही है, तो वह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। बच्ची की सोच उस समय विकसित हो जाती है।
-डॉ. प्रियंका शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, अलवर
Updated on:
26 Oct 2025 02:46 pm
Published on:
26 Oct 2025 02:46 pm
