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Alwar: नए रूप में नजर आएगा जानकी मैया का 200 साल पुराना ऐतिहासिक रथ

विश्व ​प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में माता जानकी जिस रथ में सवार होकर जाती है, उसे नया रूप दिया जा रहा है। करीब 200 वर्ष पुराने इस रथ को नया रूप देने के लिए बुर्जा के कारीगरों को काम सौंपा गया है।
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अलवर

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Umesh Sharma

Jul 31, 2026

janki rath

माता जानकी का रथ

अलवर के पुराना कटला जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान काम में आने वाला माता जानकी का रथ अगले साल भक्तों को नए रूप रंग में नजर आएगा। मंदिर समिति की ओर से इस रथ को फिर से तैयार करवाया जा रहा है। यह रथ इंद्र विमान रथ से भी अधिक पुराना है क्योंकि पहले भगवान जगन्नाथ की सवारी इसी रथ में निकलती थी। बाद में इंद्र विमान आने के बाद इस रथ को जानकी मैया के रथ के रूप में काम में लिया जाने लगा है।


लकड़ी से बना यह रथ काफी प्राचीन होने के कारण इसको फिर से तैयार करने की जरुरत बन गई थी। मंदिर के महंत पं. धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि रथ को नए रूप में तैयार करने का काम बुर्जा के कारीगरों की ओर से किया जाएगा। 10 अगस्त के बाद यह काम शुरू होगा। इसके लिए लकड़ी से बने इस रथ को फिर से खोलकर तैयार किया जाएगा। इसको फिर से तैयार करने में लंबा समय लगेगा। काम होने के बाद इस रथ की आयु और बढ़ जाएगी और आगामी पीढि़यां भी इसे देख पाएंगी। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के बाद रथों को रथखाने में रखवा दिया जाता है लेकिन इस बार जानकी मैया के रथ को अभी बाहर ही रखा हुआ है। काम पूरा होने के बाद इसे रथखाने में भेजा जाएगा।

हर साल रथयात्रा से पहले होती है साज-सज्जा

जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव से ठीक पहले इंद्रविमान, मां जानकी और सीतारामजी के रथ की साज-सज्जा की जाती है। इनका रंग-रोगन करने के साथ ही रथ को मजबूती दी जाती है। महोत्सव के संपन्न होने के बाद इन्हें रथखाने में रख दिया जाता है। यात्रा निकलने से पहले सभी रथों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।

कभी बैल खींचते थे रथ

बरसों पुराने इन रथों को पहले बैल खींचा करते थे। लोगों भी इन्हें खींचते थे, लेकिन आधुनिक युग में अब ट्रैक्टर या अन्य साधनों से इन्हें खींचकर रूपबास तक ले जाया जाता है। इन रथों पर किया गया काम आज भी लोगों को खूब​ लुभाता है। आज भी लोगों के बीच यही चर्चा रहती है कि क्या आज इस तरह के दुर्लभ रथों का निर्माण किया जा सकता है।