
अलवर में जल्द ही ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर जैसे शहरों में नॉइस मॉनिटरिंग स्टेशन बनाने की घोषणा की है। इन शहरों के कुछ एरिया में शोर मचाना मना होगा। उसी तर्ज पर अन्य शहरों का भी चयन होगा। अलवर भी इस योजना में फिट है। क्योंकि छोटा शहर है और वाहनों की अधिकता कम है। ऐसे में योजना धरातल पर आसानी से उतर सकती है। मोती डूंगरी एरिया व आर्मी इलाका इस योजना का हिस्सा हो सकता है।
एक्सपर्ट एवं यूआइटी के एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी के मुताबिक देशभर के सभी अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों (स्कूल, कॉलेज) और न्यायालय परिसर के 100 मीटर के दायरे को ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के तहत साइलेंट जोन माना जाता है। ऐसे में जेल सर्किल से लेकर मोती डूंगरी होते हुए कटीघाटी तक का एरिया साइलेंट जोन में रखा जा सकता है।
क्योंकि जेल सर्किल से कटीघाटी तक का एरिया स्मार्ट पथ में शामिल किया गया है। स्मार्ट सिटी परियोजना जयपुर से मंजूरी के बाद दूसरे चरण में इसे साइलेंट जोन बनाया जा सकता है। जेल सर्किल से लेकर कटीघाटी के मध्य अस्पताल, शिक्षण संस्थान, मिनी सचिवालय, कोर्ट भवन आदि एरिया आता है।
यूआइटी के रिटायर्ड एक्सईएन प्रमोद शर्मा ने बताया कि मोती डूंगरी एरिया के अलावा आर्मी एरिया को साइलेंट जोन में रखा जा सकता है। वाहनों की अधिकता इस एरिया में कम है, जिससे योजना धरातल पर आसानी से उतारी जा सकती है। मनु मार्ग को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। साइलेंट जोन बनाने के लाभ शहर को व जनता को मिलेगा।
-मानसिक तनाव में कमी आएगी। बेहतर एकाग्रता और स्वास्थ्य सुधार होता है।
-अस्पताल, स्कूल और अदालतों के आसपास शोर कम होने से जनता के कार्यों को निपटाने में और तेजी देखी जा सकती है।
-चिड़चिड़ापन कम होता है और पशु-पक्षियों से लेकर वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा होगी
-65 डेसीबल तक आवाज सुनी जा सकती, इससे ज्यादा होने पर उसे चिड़चिड़ापन और उच्च रक्तचाप की शिकायत होती है।
Published on:
16 Feb 2026 11:26 am
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