
आजादी के 70 वर्ष बाद भी औधोगिक विकास से महरूम है अलवर का यह क्षेत्र, हो रहा है सौतेला व्यवहार
कठूमर. आजादी सत्तर साल बीत जाने के बाद भी उपखंड मुख्यालय औद्योगिक विकास से महरूम है। उद्योग नहीं होने से हालात यह है कि रोजगार के अभाव में न केवल ग्रामीण क्षेत्र के हजारों लोग पंजाब सहित अन्य राज्यों में मजदूरी कर जीवन यापन करने के लिए मजबूर है। बल्कि सीमित आय के चलते उनके जीवन स्तर में कोई सुधार नही आया है। कठूमर विधान सभा मुख्यालय विकास की दृष्टि से दो पाटों में फंसा हुआ है। लोकसभा क्षेत्र भरतपुर व प्रशासनिक हिसाब से अलवर जिले में आता है।
औद्योगिक इकाइयों के अभाव में ग्रामीण श्रमिकों व तकनीकी रूप से दक्ष लोगो को भिवाड़ी, धारूहेडा, दिल्ली, गुरूग्राम जाकर वहां के औद्योगिक इकाइयोंं में जाकर कार्य करना पड़ रहा है। वहां के खर्चे के बाद घर लाने के लिए शेष राशि जो बहुत कम बचती है, जिससे मुश्किल से परिवार का पेट पालना पड़ता है। इधर कम पढ़े- लिखे लोग पंजाब आदि राज्यो में रूई इत्यादि तोड़ कर मेहनत मजदूरी करते हैं।
रोजगार के लिए लोगो के पलायन करने का असर यहां के बाजारों में भी गत कुछ सालों से दिखने लगा है। लोगों की नियमित मौजूदगी नही होने से त्यौहार इत्यादि छोडकऱ बाजार में बिक्री में कमी आई है। धंधें में मंदी के चलते व्यापारी भी धीरे-धीरे शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। कुल मिलाकर आगामी समय में यदि लोगों को रोजगार नही मिला तो यहा वीरानी सी छा जाएगी।
क्यों है सौतले व्यवहार
कठूमर भौगोलिक हिसाब अलवर जिले मेंऔर राजनीतिक सीमांकन में संसदीय क्षेत्र भरतपुर में आता है। बस यह ही वजह है कि अब तक यह विकास से महरुम है। क्षेत्र वासियों को मलाल है कि जिले के भिवाडी,बहरोड, व नीमराणा तहसील मे उधोग विकसित होने से वही विकास के लिए युवाओ को रोजगार मिल रहा है। जबकि कठूमर क्षेत्र युवा रोजगार के लिए दर -दर ठोकर खा रहा है।
डार्क जोन में भू-जलस्तर
क्षेत्र का भू -जलस्तर जिले के डार्क जोन मे है। जल की किल्लत के चलते चम्बल का पानी लाने की कवायद चुनावी वादा बनी हुई है। वही क्षेत्र के 58 गांव फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर है। अधिकाश गांव शुद्ध व मीठे जल को तरस रहे है। ऐसा नहीं है कि यहां के जनप्रतिनिधि सरकार में अपना मुकाम नहीं रखते हो । इलाके से राज्य सरकार में राज्य मे मंत्री भी रहे हैं।
इसके वाबजूद रोजगार के हिसाब से क्षेत्र अब तक खाली हाथ है। करीब दो लाख बीस हज़ार की आबादी वाले इस कस्बे में उद्योगों के नहीं होने से बड़ी संख्या मे युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
कठूमर के लागो को रोजगार की ईकाइयों की महत्ती आवश्यकता है। सरकार ऐसी पहल करती है। तेेो पंचायत समिति जमीन इत्यादि की कोशिश करेगी। संजय खंीची, प्रधान कठूमर
Published on:
04 Oct 2018 10:41 am
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