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अलवर में अधिकारी ही सरकारी खजाने तक नहीं पहुंचने दे रहे पैसे, जानिए कैसे

अलवर में सरकार को स्टाम्प ड्यूटी के करीब एक करोड़ देने के लिए चक्कर लगा रहे लोग, लेकिन अधिकारी खुद ही कर रहे देरी।

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अलवर

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Prem Pathak

Mar 27, 2018

OFFICERS CAN'T LET REACH MONEY TO GOVT. TREASURY

सरकारी खजाने में करीब एक करोड़ रुपए स्टाम्प ड्यूटी के रूप में देने के लिए जिलेभर के काफी लोग तहसील में थक हार कर वापस लौट रहे हैं। एक तरफ तो सरकार का खजाना खाली है, दूसरी तरफ अधिकारी ही खजाने तक पैसा पहुंचाने में देरी करा रहे हैं। अलवर तहसील में पिछले दस दिन से 80 से 100 दस्तावेज व रजिस्ट्रयां अटकी पड़ी हैं, जिनका पंजीयन नहीं हो पा रहा है।

एक दस्तावेज से मिलता है बीस हजार से एक लाख तक राजस्व: अलवर तहसील में करीब 100 दस्तावेज हैं, जिनका पंजीयन होना है। अधिकतर रजिस्ट्री के हैं। ये करीब दस दिन पुराने हैं। औसतन एक दस्तावेज से सरकार को 20 हजार से 1 लाख रुपए की स्टाम्प ड्यूटी के जरिए राजस्व मिलना है तो करीब एक करोड़ रुपए से अधिक के दस्तावेज पंजीयन होने हैं।

पल्लवी छह दिन से आ रही खैरथल से

युवती पल्लवी पिछले छह दिनों से खैरथल से अलवर तहसील में आ रही हैं। रजिस्ट्री कराने के लिए रोजाना सुबह 11 बजे आते हैं और शाम को चार बजे वापस लौट रहे हैं। पल्लवी ने बताया कि अधिकारी दफ्तर में नहीं बैठ रहे। मैं ही नहीं परिवार के अन्य लोगों को भी आना पड़ रहा है। किसी को दुकान पर जाना होता है। किसी को कोई दूसर कार्य। कुछ नहीं कर पा रहे हैं। केवल अधिकारी के नहीं आने से काम अटका पड़ा है। इसी तरह योगश यादव को एक ईडब्ल्यूएस मकान की रजिस्ट्री करानी है। सात दिन से रजिस्ट्रार कार्यालय में कागजात लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक रजिस्ट्री अटकी पड़ी है। कभी सर्वर की समस्या बताई जाती है।

मार्च क्लॉजिंग पर भी ध्यान नहीं

अक्सर देखने में आता है कि मार्च क्लोजिंग में तो अधिक से अधिक कार्य होता है। अधिकारी व कर्मचारियों के अवकाश तक रोक दिए जाते हैं। जबकि अलवर तहसील में अधिकारियों के नहीं बैठने से कामकामज अटक रहा है।

सात और छह प्रतिशत ड्यूटी

दस्तावेजों की रजिस्ट्रीय या पंजीयन सात प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी पर होता है। महिलाओं के नाम वाले दस्तावेज या रजिस्ट्री पर छह प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी लगती है।