
अलवर शहर स्थित लादिया मोहल्ले और आसपास की कॉलोनियों में इन दिनों पैंथर की सक्रियता ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। पिछले कई दिनों से इलाके में पैंथर का खौफ इस कदर हावी है कि लोग सूर्यास्त के बाद घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। हालांकि वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है, लेकिन पैंथर की धरपकड़ न होने से स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है।
घटनाक्रम के अनुसार सोमवार की रात करीब 8:36 बजे लादिया मोहल्ले की सदाशिव कॉलोनी में एक पैंथर घुस आया। पैंथर एक कुत्ते का पीछा करते हुए गलियों में दौड़ता नजर आया। गनीमत रही कि कुत्ता पैंथर के चंगुल से बच निकला, लेकिन इस घटना ने पूरी कॉलोनी को दहशत में डाल दिया है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि पिछले एक सप्ताह के भीतर मोहल्ले से 10 से अधिक पालतू और आवारा कुत्ते गायब हो चुके हैं। लोगों को अंदेशा है कि इन सभी का शिकार इसी पैंथर ने किया है।
सदाशिव कॉलोनी से सटा हुआ जंगली और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पैंथर को पकड़ना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। टीम लगातार निगरानी कर रही है, लेकिन पहाड़ी ढलानों और झाड़ियों के कारण पैंथर को ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है। मोहल्ले वासियों ने विभाग से मांग की है कि पैंथर को जल्द से जल्द पकड़कर दूर जंगल में छोड़ा जाए ताकि लोग बिना किसी डर के रात को बाहर निकल सकें। फिलहाल, वन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और अकेले अंधेरे में बाहर न निकलने की सलाह दी है।
मामला सार्वजनिक होने के बाद वन विभाग हरकत में आया। रेंजर शंकर सिंह के निर्देशन में एक विशेष टीम ने सदाशिव कॉलोनी पहुंची और स्थानीय लोगों से संवाद किया। रेंजर ने बताया कि मंगलवार की रात पैंथर का कोई नया मूवमेंट दर्ज नहीं किया गया है और न ही इलाके में उसके पदचिन्ह मिले हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पैंथर लगभग दो से ढाई साल की उम्र का है। रेंजर का कहना है कि व्यस्क पैंथर आमतौर पर आबादी वाले क्षेत्रों में आने से कतराते हैं, लेकिन कम उम्र के पैंथर आसान शिकार की तलाश में अक्सर रिहायशी इलाकों का रुख कर लेते हैं। कुत्तों का शिकार करना इनके लिए तुलनात्मक रूप से सरल होता है, इसलिए यह पैंथर बार-बार कॉलोनी की तरफ आ रहा है।
Published on:
19 Mar 2026 01:21 pm
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