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दिल्ली-एनसीआर में बदलेगा पार्टिकुलेट मैटर का मानक

-पीएम उत्सर्जन की सीमा 50 मिलीग्राम प्रति नॉर्मल क्यूबिक मीटर करने का प्रस्ताव -17 अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर हो सकता है लागू

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अलवर

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Umesh Sharma

Feb 24, 2026

अलवर. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों पर सख्ती की तैयारी की है। आयोग ने औद्योगिक इकाइयों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति नॉर्मल क्यूबिक मीटर तय करने का प्रस्ताव दिया है। इस साल अगस्त तक यह प्रस्ताव लागू होने की संभावना है। यह नया मानक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से चिन्हित 17 अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर लागू हो सकता है। आइटीआइ कानपुर और सीपीसीबी की तकनीकी समिति की सिफारिशों को आधार बनाकर यह मानक तय करने का आधार बनाया गया है।
इसलिए पड़ी जरूरत
दिल्ली-एनसीआर में हर साल प्रदूषण अत्यधिक गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उद्योगों से निकलने वाला धुआं हैं। जो लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल रहा है। जिन औद्योगिक इकाइयों पर पहले से ही 50 मिलीग्राम प्रति नॉर्मल क्यूबिक मीटर से कम का सख्त पीएम उत्सर्जन मानक लागू है, वे इस नए प्रावधान से बाहर रहेंगी।
राज्य सरकारों को दिए निर्देश
आयोग ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों, संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को निर्देश देकर तय समय-सीमा में इन नियमों को सख्ती से लागू कराएं। इसे लेकर उद्योगों और अन्य हितधारकों के बीच जागरुकता फैलाने के लिए अभियान भी चलाएं।
इन उद्योगों पर हो सकता है लागू
रेड कैटेगरी के प्रदूषणकारी उद्योग, बॉयलर या थर्मिक फ्लूड हीटर संचालित फूड व फूड प्रोसेसिंग इकाइयां, टेक्सटाइल उद्योग और फर्नेस आधारित मेटल उद्योगों पर यह नियम लागू होगा। अन्य उद्योगों पर भी इन मानकों को इस साल के अंत तक लागू किया जा सकता है।

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