
कैचमेंट एरिया घटने से सिंचाई और भूजल पर पड़ेगा असर
बावरिया बांध के पेटे में पावर ग्रिड स्टेशन लगाने की तैयारी की जारी है। एक निजी कंपनी ने अब तक करीब 80 बीघा जमीन खरीद ली है और करीब 320 बीघा भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। मौके पर बिजली उपकरण भी पहुंचने लगे हैं। हालांकि, जल संसाधन (सिंचाई) विभाग ने इस परियोजना के लिए अभी तक कोई एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी नहीं की है। विभाग का कहना है कि खातेदारी जमीन की खरीद-फरोख्त तो संभव है, लेकिन बांध के पेटे या कैचमेंट एरिया में स्थायी निर्माण, चारदीवारी या व्यावसायिक गतिविधियां नियमों के खिलाफ हैं। विभागीय टीम मंगलवार को मौके का निरीक्षण करेगी और संबंधित बिजली निगम को नोटिस देने की तैयारी भी है।
10 किलोमीटर क्षेत्र को मिलता है फायदा
बांध भरने के बाद आसपास करीब 10 किलोमीटर के दायरे में भूजल स्तर बढ़ता है। इससे किसानों को सिंचाई में सीधा लाभ मिलता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कैचमेंट एरिया में निर्माण हुआ तो बारिश का पानी बांध तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाएगा। इससे बांध की जलभराव क्षमता घट सकती है और भूजल रिचार्ज भी कम हो सकता है।
ग्रामीणों ने विरोध शुरू किया
बांध से जुड़े पांच गांवों के लोगों ने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि सरकार एकतरफ तो जल संरक्षण की बात करती है और दूसरी तरफ कैचमेंट एरिया में व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति देना गलत है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत जयपुर स्तर पर करने की बात कही है।
बांध की जमीन के ये हैं नियम
-बांध के पेटे व कैचमेंट क्षेत्र में किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं है, जिससे जल संग्रहण क्षमता या प्रवाह प्रभावित हो।
-पेटे की जमीन पर स्थायी भवन निर्माण प्रतिबंधित
-चारदीवारी या व्यावसायिक गतिविधि पर रोक
-जलभराव क्षेत्र में भू-उपयोग परिवर्तन के लिए विभागीय अनुमति अनिवार्य
पावर ग्रिड लगने के संभावित नुकसान
-कैचमेंट एरिया कम होने से बांध की जलधारण क्षमता में कमी
-भूजल रिचार्ज कम होगा
-किसानों की फसलों पर हाईटेंशन लाइनों का खतरा
-भविष्य में सिंचाई परियोजनाओं पर प्रभाव
फैक्ट फाइल:
बांध का निर्माण- स्टेट टाइम
कुल एरिया- 2900.36 हेक्टेयर
खेती की जाती है -1852 हेक्टेयर
भराव क्षमता -196 एमसीएफटी
बांध की गहराई- 10 फीट
Updated on:
24 Feb 2026, 12:03 PM IST
Published on:
24 Feb 2026, 12:03 PM IST
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