
आयुर्वेद चिकित्साधिकारी से जानिए कोरोना काल में स्वस्थ्य रहने के उपाय, डेंगू से बचाव का तरीका भी जानें
अलवर. आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. पवन सिंह शेखावत का कहना है कि आमजन को आयुर्वेद ऋ तुचर्या के अनुसार आहार-विहार की उचित जानकारी का अभाव है। यही मौसमी बीमारियों का प्रमुख कारण है। वर्षा ऋ तु के बाद प्राय: मच्छर- मक्खियों की अधिकता से संक्रमण बढ़ता है। दूषित अन्न- जल सेवन के कारण विभिन्न प्रकार के ज्वर, फ्लू, डेंंगू, मलेरिया, टाइफाइड सहित अनेक तरह की बीमारी हो जाती हैं। इसलिए आवश्यक हो जाता है आमजन को मच्छर- मक्खियों के प्रकोप से बचना है।
डॉ. शेखावत ने बताया कि शुद्ध अन्न-जल का सेवन करना है। शरद ऋ तु में स्वभाव से ही पित्त का प्रकोप रहता है। इस कारण भी ज्वर, रक्तपित, अम्लपित्त- शिरशूल, रक्त एवं त्वक विकार, अरुचि-विबंध- आध्यमान- अजीर्ण इत्यादि मौसमी बीमारियों से आमजन ग्रसित होते है। पित्त प्रकृति वालो को इस ऋ तु में विशेष सावधानी की जरूरत होती हैं। मौसम परिवर्तन के साथ ही तामपान में भी परिवर्तन होता है। जो मौसमी बीमारियों का कारण बनता है। प्राय: आमजन इस ऋ तु परिवर्तन के अनुसार अपने आहार-विहार में परिवर्तन न करते हुए लापरवाही बरतते है । आने वाले मौसम में मधुर- लघु- शीतल- तिक्त रस वाले द्रव्यों का प्रयोग करना चाहिए।
करेला, परमल, तुरई, मेथी, लौकी, पालक, मूली ,टमाटर, गोभी, नारियल हितकर हैं। त्रिफला-मुन्नका प्रयोग उचित रहता है। उष्ण- गुरु- विदाहि- तीक्ष्ण- मशालेदार- तले खाध पदार्थों का प्रयोग न करें। ऐसा करने से निश्चित ही मौसमी बीमारियों से हमारा बचाव रहेगा। साथ ही कोविड से बचाव के लिए मास्क-हैंड सेनेटाइजेसन, सोशल डिस्टेंस की पालना बहुत जरूरी है। इसके साथ निम्न आयुर्वेद उपायों-आयुुर्वेद उपाय जैसे योग अभ्यास, गुनगुने पानी, च्यवनप्राश, हल्दी दूध का सेवन, सेंधा नमक -हरिद्रा से गरारे, तिल या नारियल तेल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर बीमारी से दूर रह सकते हैं। कोविड के संक्रमण से बचा जा सकता है।
Updated on:
20 Oct 2020 11:39 am
Published on:
20 Oct 2020 11:39 am
